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संयुक्त राष्ट्र चीनी भाषा दिवस: भाषा की शक्ति और संस्कृति की झलक

April 19, 2025

संयुक्त राष्ट्र चीनी भाषा दिवस: भाषा की शक्ति और संस्कृति की झलक

हर साल 20 अप्रैल को दुनियाभर में संयुक्त राष्ट्र चीनी भाषा दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक अनोखी भाषा के उत्सव का अवसर है—एक ऐसी भाषा जो न केवल दुनिया की सबसे पुरानी और समृद्ध भाषाओं में गिनी जाती है, बल्कि आज भी करोड़ों लोगों को एक साझा सांस्कृतिक धागे में पिरोती है। चीनी भाषा दिवस, उस विरासत का सम्मान है जो सदियों से लोगों को जोड़ती आ रही है और आधुनिक युग में वैश्विक संवाद का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।

चीनी भाषा, विशेष रूप से मंदारिन, सिर्फ चीन की आधिकारिक भाषा नहीं है, बल्कि अब एक वैश्विक प्रभाव वाली भाषा बन चुकी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग 140 करोड़ से अधिक लोग मंदारिन बोलते हैं— या तो इसे अपनी पहली भाषा के रूप में अपनाए हुए हैं, या दूसरी भाषा के रूप में सीख रहे हैं। सोचिए, दुनिया का हर पाँचवां व्यक्ति चीनी भाषा में बात करने में सक्षम है! यह भाषा अपने अनूठे टोन, लिपि और व्याकरण के कारण दूसरी भाषाओं से अलग है, और यही उसे इतना खास बनाता है।

चीनी भाषा न केवल बातचीत का माध्यम है, बल्कि यह चीन की हजारों साल पुरानी सभ्यता, साहित्य, दर्शन और कला की अभिव्यक्ति भी है। इसकी लिपि—चित्रात्मक अक्षरों से बनी—खुद में एक कला है, जिसमें हर अक्षर एक कहानी कहता है। यह भाषा विचारों को केवल शब्दों के माध्यम से नहीं, बल्कि भावनाओं और प्रतीकों के ज़रिए भी संप्रेषित करती है। यही कारण है कि जब हम चीनी भाषा की बात करते हैं, तो हम दरअसल एक पूरी सांस्कृतिक परंपरा की बात कर रहे होते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने इस भाषा को मान्यता देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि चीनी भाषा न केवल एक क्षेत्रीय भाषा है, बल्कि वैश्विक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक अहम स्तंभ भी है। इस दिन को मनाने का मकसद है लोगों को चीनी भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूक करना, भाषा के जरिए विविधताओं को समझना और एक-दूसरे से जुड़ने की भावना को प्रोत्साहित करना।

संयुक्त राष्ट्र ने साल 2010 में अपनी छह आधिकारिक भाषाओं— अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश— के लिए विशेष दिवस तय किए, ताकि इन भाषाओं के इतिहास, संस्कृति और वैश्विक महत्व को बढ़ावा दिया जा सके। इसी कड़ी में चीनी भाषा दिवस हर साल 20 अप्रैल को मनाया जाता है, जो न सिर्फ़ एक भाषा की ताकत का जश्न है, बल्कि उससे जुड़ी समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान भी है।

20 अप्रैल की तारीख यूं ही नहीं चुनी गई। यह दिन चीनी पंचांग के अनुसार ‘कुयू’ (Grain Rain) नामक सौर अवधि के आसपास आता है, जो कृषि और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं में एक महत्वपूर्ण समय माना जाता है। यह अवधि वर्षा ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है और जीवन के नवसृजन का संदेश देती है। यही नहीं, इस दिन को महान विद्वान थ्सांगच्ये की याद में भी चुना गया, जिन्हें चीनी लेखन प्रणाली का जनक माना जाता है। उनका योगदान न केवल भाषा के विकास में अहम रहा, बल्कि उन्होंने चीन की सांस्कृतिक नींव को भी मजबूत किया।

चीनी भाषा दिवस दरअसल एक ऐसा अवसर है, जब हम भाषा के ज़रिए संस्कृति, इतिहास और मानवीय संवाद की शक्ति को महसूस कर सकते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भाषा केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि वह पुल है जो विविध संस्कृतियों, परंपराओं और सभ्यताओं को जोड़ता है।

अब बात करते हैं उस दिलचस्प कहानी की, जो चीनी भाषा दिवस को खास बनाती है—थ्सांगच्ये और ‘बाजरे की बारिश‘ की पौराणिक कथा। माना जाता है कि करीब 5,000 साल पहले थ्सांगच्ये नाम के एक अत्यंत बुद्धिमान व्यक्ति ने चीनी लिपि यानी चीनी अक्षरों का आविष्कार किया था। यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं थी— उन्होंने चीन के क्षेत्र में इंसानों को पहली बार विचारों को लिखित रूप में व्यक्त करने का तरीका दिया, जिसने ज्ञान, संस्कृति और इतिहास को सहेजने का रास्ता खोल दिया।

कहानी के अनुसार, जब थ्सांगच्ये ने पहली बार इन अद्भुत अक्षरों को गढ़ा, तो देवता और पूर्वजों की आत्माएँ इस चमत्कार से इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आँसू निकलने लगे। और ठीक उसी क्षण आकाश से बाजरे की बारिश होने लगी। यह कोई आम बारिश नहीं थी—यह प्रकृति और आस्था का प्रतीक बन गई, जो इस ऐतिहासिक क्षण की दिव्यता को दर्शाती है। इसी अनोखी घटना के सम्मान में, चीनी पंचांग के एक खास सौर काल को नाम दिया गया—कुयू, जिसका अर्थ है “बाजरे की वर्षा”।

इसी ‘कुयू’ अवधि के आसपास आने वाली तारीख, 20 अप्रैल, को संयुक्त राष्ट्र ने चीनी भाषा दिवस के रूप में चुना। यह दिन न सिर्फ चीनी भाषा की समृद्ध विरासत का उत्सव है, बल्कि उस ऐतिहासिक क्षण और उस महान व्यक्ति को श्रद्धांजलि भी है, जिनकी वजह से आज करोड़ों लोग एक ऐसी भाषा के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हैं, जो चित्रों की तरह बोलती है और संस्कृति की तरह महसूस होती है।

चीनी भाषा का इतिहास हजारों साल पुराना है। इसकी जड़ें 5,000 साल से भी अधिक पुरानी मानी जाती हैं और यह दुनिया की सबसे पुरानी लगातार प्रयोग में लाई जा रही लेखन प्रणाली है। प्राचीन समय में लोग हड्डियों और कछुए के खोलों पर अक्षर उकेरते थे, जिन्हें ‘ऑरेकल बोन स्क्रिप्ट’ कहा जाता था। इन प्रतीकों का उपयोग भविष्यवाणियां करने के लिए होता था। समय के साथ यह लेखन प्रणाली कई चरणों से गुज़री और आज दो प्रमुख रूपों में प्रयोग होती है – सरल चीनी, जो मुख्य रूप से मेनलैंड चाइना में इस्तेमाल होती है, और ट्रेडिशनल चीनी, जिसका उपयोग चीन के हॉन्गकॉन्ग, थाइवान और कुछ अन्य क्षेत्रों में होता है। भले ही इन दोनों में अक्षरों की बनावट और जटिलता में फर्क हो, लेकिन उनके भाव और अर्थ एक जैसे रहते हैं।

चीनी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि एक समृद्ध संस्कृति की वाहक भी है। इसमें छुपी है साहित्यिक गहराई, काव्यात्मक भावनाएं, और दर्शन की ऊँचाइयाँ। कन्फ्यूशियस के नैतिक सिद्धांतों से लेकर लाओ त्सी के ताओवादी विचारों तक, चीनी भाषा ने मानव सभ्यता को अनेक गहन और प्रेरणादायक विचार दिए हैं। इसका प्रभाव केवल किताबों तक सीमित नहीं है – आज चीनी संस्कृति और भाषा की झलक फिल्मों तक दिखाई देती है। चाहे वो फिल्मों की कहानी हो या कला और संगीत – चीनी प्रभाव विश्वव्यापी बन चुका है।

हर साल 20 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र चीनी भाषा दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में खास कार्यक्रम आयोजित होते हैं। कहीं चीनी कैलिग्राफी की वर्कशॉप होती है, तो कहीं चीनी फिल्मों की स्क्रीनिंग। कम्युनिटी सेंटर्स में रंग-बिरंगे ड्रैगन डांस होते हैं और डंपलिंग बनाने की प्रतियोगिताएं होती हैं। इसी तरह, संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों में भी चीनी साहित्य, इतिहास और भाषा पर आधारित व्याख्यान होते हैं, जो लोगों को इस संस्कृति से गहराई से जुड़ने का अवसर देते हैं।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इस दिन की खास धूम रहती है। 2025 में, चीनी पुस्तक क्लब की ओर से तीन आकर्षक सत्र आयोजित किए जाएंगे – एक शानदार संगीत प्रस्तुति, एक ज्ञानवर्धक संवाद और एक रोचक राउंडटेबल चर्चा, जिसमें युवा चीनी रचनाकार अपनी रचनात्मक सोच और अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा, एक खास प्रदर्शनी “24 Solar Terms: The Fifth Great Invention of Ancient China” भी लगाई जाएगी, जो प्राचीन चीन की पारंपरिक मौसम-समझ प्रणाली को उजागर करेगी।

इस वर्ष के आयोजन को खास बनाने के लिए कई बड़े संगठनों की भागीदारी तय की गई है – संयुक्त राष्ट्र महासभा, सुरक्षा परिषद, चीन का स्थायी मिशन, जन सूचना विभाग, महासभा सम्मेलन एवं बैठक विभाग, संयुक्त राष्ट्र के दुभाषिया, रेडियो और मल्टीमीडिया टीमें। इनके साथ-साथ विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि, भाषा विशेषज्ञ, अनुवादक और शिक्षाविद इस आयोजन में शामिल होंगे।

असल में, चीनी भाषा दिवस सिर्फ भाषा का उत्सव नहीं है, बल्कि उस पूरी सभ्यता और संस्कृति से जुड़ने का अवसर है, जिसने हजारों वर्षों तक मानवता को ज्ञान, कला और दर्शन से समृद्ध किया है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि भाषाएं सिर्फ संप्रेषण का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वो पुल होती हैं – लोगों, संस्कृतियों और विचारों को जोड़ने का एक जरिया।

तो अब सवाल उठता है – क्या चीनी भाषा सीखना जरूरी है? अगर आप खुद को एक ग्लोबल सिटिजन के रूप में देखना चाहते हैं, तो इसका जवाब है – हां। चीन आज टेक्नोलॉजी, व्यापार और यहां तक कि अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी बन चुका है। ऐसे में, चीनी भाषा सीखना न केवल आपके करियर को फ्यूचर-प्रूफ बना सकता है, बल्कि एक नई संस्कृति, उसके त्योहारों, परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर भी देता है। कभी चीनी नववर्ष मनाया है? लाल रंग की रौनक, ड्रैगन डांस और गिफ्ट में दिए जाने वाले लाल लिफाफे – इतनी रंगीन और उमंग भरी परंपरा देखकर किसी का भी मन प्रसन्न हो जाए।

तो इस 20 अप्रैल को कुछ समय निकालिए, चीनी भाषा और संस्कृति को जानने की कोशिश कीजिए। हो सकता है, चीनी कैलिग्राफी आपका अगला पसंदीदा शौक बन जाए। और कौन जाने – एक नई भाषा सीखते-सीखते आप एक नई दुनिया से भी जुड़ जाएं।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

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