Last Updated: September 27, 2026

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साल 2025: सिनेमा का ग्लोबल सेलिब्रेशन

April 23, 2025

साल 2025: सिनेमा का ग्लोबल सेलिब्रेशन

Global Celebration of Cinema : क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही साल में तीन-तीन बड़े फिल्मी सेलिब्रेशन एक साथ हो सकते हैं? अगर नहीं, तो 2025 आपकी सोच बदल देगा! जी हां, इस साल फिल्मी दुनिया का पूरा माहौल जश्न से भरा हुआ है, और वो भी सिर्फ एक देश या एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इस सेलिब्रेशन में शामिल है। चलिए, ज़रा नजर डालते हैं इस खास साल पर…

ज़रा सोचिए, अगर फिल्मों की दुनिया एक इंसान होती… तो इस साल वो अपना 130वां जन्मदिन मना रही होती। जी हां, 2025 वर्ल्ड सिनेमा की 130वीं वर्षगांठ का साल है। और इतने सालों में इस सिनेमा नाम के जादू ने न जाने कितनी कहानियाँ सुनाईं, कितनी ज़िंदगियाँ बदलीं, और कितनी यादें हमारे दिलों में बसा दीं।

वर्ल्ड सिनेमा की शुरूआत

सब कुछ शुरू हुआ फ्रांस में, जब ल्यूमियर ब्रदर्स ने पहली बार लोगों को चलती तस्वीरें दिखाई। उस वक्त लोगों ने पहली फिल्म देखी थी जिसमें एक ट्रेन स्टेशन पर ट्रेन आती दिख रही थी। मज़ेदार बात ये है कि कुछ लोग डर के मारे अपनी सीट छोड़कर भाग गए थे। उन्हें लगा कि ट्रेन सच में बाहर आ जाएगी। और तब से लेकर आज तक, सिनेमा ने जो उड़ान भरी है, वो बस कमाल की है।

सिनेमा: सिर्फ एक पर्दा नहीं, पूरी दुनिया

आज फिल्में सिर्फ टाइमपास नहीं, बल्कि हमारी सोच, पहचान और इमोशन्स की भाषा बन चुकी हैं। हॉलीवुड, बॉलीवुड, कोरियन ड्रामा, चाइनीज़ मार्शल आर्ट मूवीज़, ईरानी फिल्में, फ्रेंच सिनेमा… हर देश की फिल्मों का एक अलग अंदाज़ है, जो मिलकर बनाते हैं ‘वर्ल्ड सिनेमा’। यह एक ऐसी ग्लोबल लैंग्वेज बन चुका है, जो बगैर कुछ बोले भी बहुत कुछ कह जाती है।

120 साल का चाइनीज़ सिनेमा

अब बात करते हैं चाइनीज़ सिनेमा की, जो इस साल अपनी 120वीं एनिवर्सरी मना रहा है। 120 साल पहले, चीन में भी फिल्मों ने दस्तक दी थी और आज वो सिर्फ चीन तक सीमित नहीं, बल्कि इंटरनेशनल ऑडियंस को भी इम्प्रेस कर रहा है। जब पहली बार चीन में फिल्म बनी थी, तब साल था 1905, और पहली फिल्म थी “The Battle of Dingjunshan”– एक साइलेंट फिल्म, जिसमें आवाज़ तो नहीं थी, लेकिन कहानी बोलती थी। तब से लेकर अब तक चाइनीज़ सिनेमा के 120 साल हो गये हैं।

चाइनीज़ सिनेमा: परंपरा से ग्लोबल स्टेज तक

शुरुआत में चाइनीज़ सिनेमा ज़्यादातर लोक कहानियों, ओपेरा और इतिहास पर फोकस करता था। लेकिन धीरे-धीरे जब तकनीक बदली, समाज बदला, तो कहानियाँ भी ज़मीन से जुड़ने लगीं। 1980s और 90s में 5th जनरेशन डायरेक्टर्स जैसे चांग ईमोउ और छन खाईका ने सिनेमा को आर्ट बना दिया। उनकी फिल्में सिर्फ देखने के लिए नहीं होती थीं, महसूस करने के लिए होती थीं। अब ये सिर्फ फिल्मों का सफर नहीं है, ये एक पूरे देश की कला, संस्कृति और सोच का आइना है। और मज़ेदार बात ये है कि ये सफर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहा, इसकी रौशनी पूरी दुनिया में फैली है।

इमोशन्स, कल्चर और ग्लैमर– चाइनीज़ सिनेमा की असली ताकत

Crouching Tiger, Hidden Dragon, Hero, Raise the Red Lantern जैसी फिल्मों ने इंटरनेशनल अवॉर्ड्स बटोरे और ये साबित कर दिया कि चाइनीज़ सिनेमा किसी से कम नहीं। और आज के दौर में, जब साइंस-फिक्शन, एनिमेशन, और एक्शन फिल्में हिट हो रही हैं, तब भी चीन अपने कल्चर की झलक दिखाना नहीं भूलता।

अक्सर लोग सोचते हैं कि चाइनीज़ सिनेमा मतलब मार्शल आर्ट्स और उड़ते हुए योद्धा। पर असल में यहाँ इमोशन्स की गहराई, रिश्तों की सच्चाई और ज़िंदगी की सादगी भी मिलती है। फिल्में जैसे To Live, The Road Home, या फिर Dying to Survive, आपको हंसाती भी हैं, रुलाती भी हैं, और सोचने पर मजबूर भी करती हैं।

अब तो नया दौर है– बड़े बजट, बड़ी सोच

2025 में जब सभी चाइनीज़ सिनेमा की 120वीं सालगिरह मना रहे हैं, तो एक बात तो पक्की है– ये सिनेमा अब सिर्फ चीन का नहीं रहा, ये एक दुनिया की भाषा बन चुका है। चीनी एक्टर्स और डायरेक्टर्स अब हॉलीवुड में भी जगह बना रहे हैं। और प्लेटफॉर्म्स जैसे iQIYI और टेनसेंट वीडियो तो इंटरनेशनल ऑडियंस तक कहानियाँ पहुंचा रहे हैं।

बीजिंग बना सिनेमा की राजधानी

और अब आते हैं उस मंच पर जो न सिर्फ चाइनीज़ सिनेमा को प्रमोट करता है, बल्कि वर्ल्ड सिनेमा को एक ही छत के नीचे लाकर खड़ा कर देता है– बीजिंग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (BJIFF)। इस साल इसका 15वां एडिशन 18 से 26 अप्रैल तक मनाया जा रहा है। सोचिए, 15 साल से ये फेस्टिवल दुनिया भर की फिल्मों, डायरेक्टर्स, एक्टर्स और फिल्म लवर्स को एक साथ लाता रहा है। यहाँ न सिर्फ फिल्में दिखाई जाती हैं, बल्कि नए आइडिया, टेक्नोलॉजी और कोलेबोरेशन की बातें भी होती हैं। BJIFF की शुरूआत साल 2011 में हुई थी। तब से ये फेस्टिवल शांगहाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के साथ मिलकर चीन के सबसे बड़े और शानदार फिल्म फेस्टिवल्स में से एक बन गया है।

थ्येनथान अवार्ड्स: इंटरनेशनल टैलेंट का सम्मान

बीजिंग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (BJIFF) का सबसे बड़ा आकर्षण है इसका थ्येनथान अवॉर्ड्स सेक्शन। ये वो जगह है जहां दुनिया भर की बेहतरीन फिल्में एक-दूसरे से मुकाबला करती हैं। इस बार 15 फुल-लेंथ फिल्में 10 अलग-अलग कैटेगरीज़ में कॉम्पिटिशन के लिए तैयार हैं। इनमें बेस्ट फीचर फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, और बेस्ट लीडिंग एक्टर/एक्ट्रेस जैसे अवॉर्ड्स शामिल हैं।

और हां, क्योंकि ये 15वीं एनिवर्सरी है, तो सेलिब्रेशन भी जबरदस्त हो रहा है। पूरे 33 सिनेमाघरों और एक इमर्सिव यानि 360-डिग्री एक्सपीरियंस वाला वेन्यू में 300 से भी ज़्यादा फिल्में दिखाई जा रही हैं। इसके अलावा “बीजिंग स्क्रीनिंग” नाम का एक खास सेक्शन भी शुरू किया गया है, जिसमें लगभग 900 शो होंगे जिसमें दुनियाभर की शानदार फिल्में, क्लासिक फिल्मों के रीमास्टर्ड वर्ज़न और नए-नए टैलेंट की चीनी फिल्में देखने को मिलेंगी। तो कुल मिलाकर, 2025 का ये एडिशन सिर्फ एक फेस्टिवल नहीं, बल्कि फिल्म प्रेमियों के लिए एक जश्न है। ऐसा जश्न जो बीते 15 सालों से चीन की राजधानी बीजिंग को दुनिया की फिल्म राजधानी बनाने में जुटा है।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

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