Indus Canal Dispute Deepens : इंटरनेशनल डेस्क: पाकिस्तान में सिंधु नदी पर प्रस्तावित नहर परियोजना ने राजनीतिक संकट को जन्म दे दिया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आगामी कॉमन इंटरेस्ट्स काउंसिल (सीसीआई) की बैठक में विवादित नहर परियोजना पर समाधान नहीं निकला, तो वह संघीय सरकार से समर्थन वापस ले लेगी।
-2 मई को होगी सीसीआई की एक अहम बैठक
स्थानीय मीडिया के अनुसार, 2 मई को सीसीआई की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसका मुख्य एजेंडा सिंधु नदी पर छह नई नहरों के निर्माण को लेकर आम सहमति बनाना है। सिंध प्रांत में इस परियोजना का तीखा विरोध हो रहा है। वहां लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
-पीपीपी के वरिष्ठ नेता ने दी चेतावनी
सिंध के ऊर्जा मंत्री और पीपीपी के वरिष्ठ नेता नासिर शाह ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “अगर बैठक में सिंधु नहरों के मुद्दे का हल नहीं निकला, तो पीपीपी सरकार का साथ छोड़ देगी।” उन्होंने कहा कि नहर परियोजना सिंध के जल अधिकारों को प्रभावित कर सकती है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शाह ने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) के नेताओं से भी मुलाकात की और आगामी सीनेट उपचुनाव में रिक्त सीट के लिए अपना उम्मीदवार वापस लेने का आग्रह किया। मुलाकात के बाद शाह ने कहा, “नहर का मुद्दा सिंध के हर नागरिक के लिए बेहद संवेदनशील है और इसने पूरे प्रांत को एकजुट कर दिया है।”
-पाकिस्तानी सरकार ने बनाई नई योजना
पाकिस्तानी सरकार ने ‘ग्रीन पाकिस्तान इनिशिएटिव’ के तहत लगभग 3.3 अरब डॉलर की लागत से छह नहरें बनाने की योजना बनाई है। इस परियोजना का उद्देश्य दक्षिण पंजाब की 12 लाख एकड़ कथित बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाना है। हालांकि सिंध सरकार का मानना है कि इस परियोजना से सिंधु नदी से मिलने वाला उनका जल हिस्सा प्रभावित होगा, जिससे प्रांत के किसानों और आम लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। पीपीपी का यह कड़ा रुख शरीफ सरकार के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आया है। आने वाले दिनों में सीसीआई बैठक इस विवाद के भविष्य का फैसला करेगी।
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