
एंटरटेनमेंट डेस्क: गर्मियों में बढ़ते तापमान ने दिल्ली एनसीआर में हर किसी के जीवन को मुश्किल बना दिया है, लेकिन इस कठिन समय में हेमकुंट फाउंडेशन ने एक संवेदनशील और क्रांतिकारी कदम उठाया है। फाउंडेशन ने इस साल के ग्रीष्मकाल में आवारा पशुओं और पक्षियों को राहत पहुंचाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। उनका उद्देश्य इन जंगली प्राणियों को सर्दियों से लेकर गर्मियों तक एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण देना है।
यह पहल खास है क्योंकि यह सिर्फ पशुओं और पक्षियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव स्थानीय समुदायों पर भी पड़ा है। फाउंडेशन ने शहर के विभिन्न इलाकों में मिट्टी के पानी के बर्तन और हाथ से बनाए गए घोंसले लगाए हैं। यह बर्तन गर्मी में अत्यधिक प्रभावित होने वाले जानवरों और पक्षियों को पीने का पानी उपलब्ध कराते हैं, जबकि घोंसले उन्हें सुरक्षित विश्राम का स्थान प्रदान करते हैं।
-दोहरा लाभ: वन्यजीवों की मदद और स्थानीय आजीविका का समर्थन
हेमकुंट फाउंडेशन की इस पहल में एक अनूठा पहलू यह है कि इसे दोनों पक्षों का लाभ होता है। मिट्टी के बर्तन और घोंसले स्थानीय सड़क विक्रेताओं और कुम्हारों से खरीदे गए हैं, जो गर्मियों के दौरान अपनी रोज़मर्रा की बिक्री में कमी का सामना करते हैं। फाउंडेशन ने इन कुम्हारों और विक्रेताओं को आर्थिक रूप से मदद पहुंचाकर उनका समर्थन किया है। यह पहल न केवल जानवरों और पक्षियों के लिए सहायक है, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों के लिए भी एक स्थिर आय का स्रोत बनकर उभरी है।
हेमकुंट फाउंडेशन के निदेशक, हरतीरथ सिंह ने इस अभियान के बारे में बात करते हुए कहा, “यह पहल केवल पानी और आश्रय देने से कहीं बढ़कर है। यह हमें मानवता, करुणा और स्थिरता के साथ एक नए दृष्टिकोण से जोड़ती है। इस पहल का लक्ष्य न केवल आवारा जानवरों की मदद करना है, बल्कि साथ ही स्थानीय कुम्हारों और विक्रेताओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।”
-सामुदायिक भागीदारी: हर किसी का योगदान जरूरी
हेमकुंट फाउंडेशन ने इस पहल को सामुदायिक सहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा है। बर्तन और घोंसले विभिन्न सार्वजनिक स्थानों जैसे पार्कों, सड़कों के कोनों और आवासीय इलाकों में लगाए जा रहे हैं, जहां अधिकतर लोग आते-जाते हैं। इसके अलावा, फाउंडेशन ने स्थानीय निवासियों को भी इस पहल में शामिल करने के लिए प्रेरित किया है। वे अपने आसपास के पानी के बर्तनों को नियमित रूप से भरकर इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।
-दया, करुणा और स्थिरता का चक्र
यह पहल सिर्फ आवारा पशुओं और पक्षियों के लिए गर्मी में राहत प्रदान करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र रूप से दया और स्थिरता की भावना को बढ़ावा देती है। हेमकुंट फाउंडेशन का मानना है कि अगर हम अपने छोटे-छोटे प्रयासों से एक दूसरे की मदद करें, तो एक बड़ा बदलाव संभव है। यही वजह है कि इस अभियान के माध्यम से फाउंडेशन ने न केवल समाज के कमजोर वर्गों की मदद की है, बल्कि प्रकृति और जानवरों के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया है।
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