जालंधर: केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका तथा विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्तियों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों के लिए शुरू की गई बातचीत के दौरान देश के उद्योग, खुदरा व्यापार तथा कृषि क्षेत्र पर इन समझौतों के विनाशकारी प्रभाव को रोकने के लिए उपयुक्त योजना तैयार करने के लिए आज जालंधर के देश भगत यादगार हॉल में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अनूठे सेमिनार में किसान संगठनों के अलावा समाज के विभिन्न वर्गों के तीन दर्जन से अधिक संगठनों ने भाग लिया। इन समूहों में खुदरा व्यापार और आढ़तिया वर्ग से जुड़े संगठनों के साथ-साथ श्रमिक, कर्मचारी, बुद्धिजीवी, युवा और महिलाएं भी शामिल थीं। सेमिनार, जिसका नेतृत्व बलबीर सिंह राजेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, बूटा सिंह बुर्जगिल, रमिंदर सिंह पटियाला, बलदेव सिंह निहालगढ़, डॉ. सतनाम सिंह अजनाला, रुलदू सिंह मानसा और जंगवीर सिंह चौहान के अध्यक्ष मंडल ने किया, जोगिंदर सिंह उगराहां ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए शुरुआत की।

संयुक्त किसान मोर्चा का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रमुख किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने विचार-विमर्श के लिए सेमिनार का मसौदा पेश करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका और अन्य प्रमुख आर्थिक शक्तियों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों के लिए बातचीत अगर अंतिम रूप ले लेती है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से उद्योग, खुदरा व्यापार और कृषि क्षेत्रों में 80 करोड़ लोगों के जीवन पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने घरेलू और विदेशी कॉरपोरेट घरानों के इस बड़े हमले के खिलाफ समाज के सभी वर्गों के बीच व्यापक एकता बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि आज का सेमिनार किसानों के आंदोलन को बदनाम करने के लिए बनाए जा रहे नैरेटिव को नाकाम करने के लिए आपके सुझावों और आलोचनाओं से सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सेमिनार में विभिन्न वर्गों के संगठनों के ढाई दर्जन नेताओं ने बैठकर साढ़े तीन घंटे तक अपने बहुमूल्य सुझाव दिए और संयुक्त किसान मोर्चा की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों का देश के बड़े हिस्से के जीवन पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश की केंद्र सरकार अमेरिका के सामने झुक गई है। इस समय सभी वर्गों को इसके खिलाफ व्यापक एवं समग्र एकता बनाकर लोगों में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है।
वक्ताओं ने किसान आंदोलन को इस मामले में आगे आकर सबको साथ लेकर चलने का सुझाव देते हुए कहा कि इस अवसर पर संघर्ष के अनूठे स्वरूप अपनाने की जरूरत है।
सेमिनार को व्यापारियों और कारीगरों से विजय कालरा, भरत काकरिया, बुद्धिजीवियों से डॉ. परमिंदर, निर्मल सिंह धालीवाल, चंद्रशेखर, कुलविंदर सिंह वड़ैच, राजविंदर सिंह राणा, जगतार सिंह कर्मपुरा, ट्रेड यूनियनों से हरजिंदर सिंह और ग्रामीण और खेत मजदूरों से तरसेम पीटर, हरमेश मालरी, गुरनाम सिंह दाउद, गुरमेश सिंह, गुरविंदर सिंह बोदा, गुलजार सिंह गोरिया, कश्मीर सिंह गादिया और कुलवंत सिंह सेलबरा ने संबोधित किया।

सज्जन सिंह, जरमनजीत सिंह, अशोक कुमार, कृष्ण सिंह औलख, बलिहार सिंह, अतिंदरपाल घग्गा, चरण सिंह सराभा और प्रोफेसर तजिंदर विरली ने भी श्रमिक संगठनों को संबोधित किया, जसवीर कौर जस्सी ने महिला वर्ग के लिए और जतिंदर फरीदकोट, करमजीत मनुके और डॉ. धन्ना मल गोयल ने युवा वर्ग के लिए बात की।
प्राप्त सुझावों के आलोक में, यह निर्णय लिया गया कि सेमिनार के समापन पर एक अन्य सेमिनार आयोजित किया जाएगा, जिसमें व्यापारी और छात्र समुदाय को भी शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर निर्णय लिया गया कि मुक्त व्यापार समझौतों के हानिकारक प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर दो कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
सेमिनारमें 20 मई को ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत देशव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया, साथ ही राष्ट्रवाद की आड़ में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने वाले गिरोहों द्वारा किसान नेता राकेश टिकैत पर किए गए हमले की कड़ी निंदा की गई।
इस मौके पर मुकेश चंद्र शर्मा, बोघ सिंह मानसा, बलविंदर सिंह मल्ली नंगल, कंवलप्रीत सिंह पन्नू, हरजिंदर सिंह टांडा, बलविंदर सिंह राजू औलख, इकबाल सिंह मंडोली, निरवल सिंह डालेके, हरबंस सिंह संघा, वीर सिंह बरवा और कई अन्य किसान नेता भी मौजूद थे।
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