
India-Pakistan border : पहलगांव में आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के पश्चात जंग के असार अब भारत -पाकिस्तान सीमा हुसैनीवाला से सटे गांवों में साफ दिखाई देने लगे हैं। हालात ये हैं की गांव के किसान अब अपने परिवार के बच्चों और महिलाओं को कीमती सामान सहित गांव से निकालकर किसी सुरक्षित स्थान पर भेज रहे हैं। गांव खाली करने का ये सिलसिला बीती रात भारत के हमले के बाद से ही शुरु हो गया था। कई गांवों के लोग रात को ही सामान लेकर गांव खाली करके जाने लगे थे और दिन निकलते निकलते सीमा से सटे करीब आधे से अधिक गांवों के लोग सामान सहित रिश्तेदारों के घर चले गए थ।
गांव खाली करने का काम बुधवार को भी सुबह से लेकर देश शाम तक जारी रहा। गांव में केवल अब परिवार के मर्द ही दिखाई दे रहे हैं क्योंकि बच्चों को गांव से दूर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया हालांकि रोटी बनाने के लिए घरों में केवल बड़ी आयु की बुजरुग महिलाएं ही नजर आ रही हैं जिनकी आयु 60 से लेकर 80 साल तक की है। कई गांवों के हालात ये बने गए हैं की घर में बच्चों और महिलाओं के न रहने से गांव की गलियां पूरी तरह से खाली-खाली नजर आ रही हैं, ठीक वैसे जैसे की कफ्र्य लगा दिया गया हो और लोंगो को घरों के अंदर ही रहने के निर्देश दे दिए गए हों।
कई घर तो पूरी तरह से खाली दिखाई दिए क्योंकि घर का सारा सामान शहर में रिश्तेदारों के घर भेज दिया गया, वह भी महिलाओं और बच्चों सहित। वहीं यदि देखा जाए तो सीमा से सटे गांवों में रहने वाले किसानों को घर व गांव खाली करने के कोई निर्देश जिला प्रशासन या सरकार या फिर सेना की ओर से नहीं दिए गए बल्कि गांव वाले अपनी मर्जी से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गांव खाली कर रहे हैं।
इसलिए खाली करना पड़ रह है गांव सीमा से सटे लोगों की सबसे पड़ी परेशानी यह है कि हुसैनीवाला से सटे करीब सभी गांव तीन तरफ से सतलुज दरिया से घिरे हुए हैं और चौथी ओर पाकिस्तान है। गांव से शहर आने के लिए केवल एक मात्र रास्ता हैट वाला पुल ही है जो दरिया पर बना हुआ है।
ऐसे में यदि जंग लग जाती है तो वह गांव खाली करके कहीं नहीं जा सकते क्योंकि पुल बहुत तंग है और एक ही रास्ता होने के कारण सेना इसे अपने लिए इस्तेमाल करती है और किसी को यहां से आने-जाने की इजाजत नहीं होती।
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