इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका, जिसने कभी सीरिया के मौजूदा अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया था, अब उन्हीं पर से सभी प्रतिबंध हटाने का फैसला कर चुका है। यह फैसला उस समय सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब में अल-शरा से मुलाकात की। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
सीरिया ने अमेरिका के फैसले का किया स्वागत
सीरिया, जो बीते दो दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ा हुआ था, अब अमेरिका के इस अप्रत्याशित निर्णय को “नई शुरुआत” के रूप में देख रहा है। सीरियाई अधिकारियों ने अमेरिका के इस कदम का खुले दिल से स्वागत किया है।
अहमद अल-शरा का विवादित अतीत
आपको बता दें कि अल-शरा का अतीत आतंकी संगठनों, विशेषकर अल-कायदा, से जुड़ा रहा है। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने वर्षों तक उन्हें “गंभीर खतरा” माना और उन पर कई आतंकी हमलों में संलिप्त होने का आरोप लगाया। लेकिन आज वही व्यक्ति राजनीतिक वैधता के साथ सीरिया का नेतृत्व कर रहे हैं।
ट्रंप की विदेश नीति पर उठा सवाल
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के इस निर्णय को जहां एक ओर रणनीतिक समझदारी का उदाहरण बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे “आतंकवाद विरोधी नीति में दोहरापन” बता रहे हैं। कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं “क्या अमेरिका अब आतंकवाद के खिलाफ अपने पुराने सख्त रुख से पीछे हट रहा है?” “क्या यह कदम क्षेत्रीय राजनीति में स्वार्थ आधारित निर्णयों को दर्शाता है?” वहीं अब इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बहस को जन्म दिया है। खासकर अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति, मानवीय सहायता की आड़ में की गई राजनीति और आतंकवाद के खिलाफ घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति। जैसे मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई विश्लेषक इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नैतिक मूल्यों की गिरावट भी मान रहे हैं।
अब्राहम समझौते में शामिल होने की तैयारी ?
सूत्रों के मुताबिक, अहमद अल-शरा ने अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने पर सैद्धांतिक सहमति जता दी है। हालांकि सीरियाई सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अगर यह कदम उठाया जाता है, तो यह सीरिया की ऐतिहासिक विदेश नीति में बड़ा बदलाव होगा, जो दशकों से इज़रायल के विरोध में रही है।
25 वर्षों में पहली उच्च स्तरीय अमेरिका-सीरिया वार्ता
दरअसल, यह मुलाकात पिछले 25 वर्षों में अमेरिका और सीरिया के बीच पहली उच्च स्तरीय वार्ता थी। इसे ट्रंप की विदेश नीति में एक नया मोड़ और मध्य पूर्व में नई समीकरणों की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। अहमद अल-शरा जैसे विवादास्पद व्यक्तित्व को मान्यता देना और प्रतिबंध हटाना यह दर्शाता है कि अब अमेरिका वास्तविकता आधारित कूटनीति की ओर बढ़ रहा है, जिसमें रणनीति और सामरिक हित प्राथमिकता पर हैं, चाहे उसका नैतिक आधार कितना भी विवादास्पद क्यों न हो।
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