चीनी छात्र इन दिनों विभिन्न विश्विद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए परीक्षा देने में व्यस्त हैं।“काओ खाओ” नाम के इस एग्ज़ाम को इन विद्यार्थियों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और मुश्किल एग्ज़ाम माना जाता है। क्योंकि यह इम्तिहान छात्रों का जीवन बदल कर रख देता है। इस परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने वालों को देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एडमिशन मिल पाता है। जो उनके करियर को संवारने का अहम प्लेटफार्म बनता है। चीन में इस साल का कॉलेज एंट्रेंस एग्ज़ाम 7 जून को शुरू हुआ।
बता दें कि “काओ खाओ” के दौरान छात्रों के चीनी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और मानविकी जैसे विषयों में नॉलेज का गहन परीक्षण होता है। हालांकि इन दिनों परीक्षा देने वाले छात्रों की विश्वविद्यालयों में प्रवेश दर 80-90 प्रतिशत हो गयी है। लेकिन अच्छे और नामी-गिरामी यूनिवर्सिटीज़ में प्रवेश पाना बेहद कठिन होता है। एक अनुमान के मुताबिक स्कूल में अंतिम वर्ष के 600 छात्रों में से सिर्फ 10 छात्रों को ही पेइचिंग के शीर्ष विश्वविद्यालयों में एडमिशन मिल पाता है। वैसे इस एग्ज़ाम के लिए कोई उम्र सीमा नहीं होती है और एक बार कम अंक आने के बाद छात्र दोबारा भी परीक्षा दे सकते हैं।
हालांकि परीक्षा के दिन एग्जाम सेंटरों के बाहर चिंतित और उत्साहित परिजनों को देखा गया। राजधानी पेइचिंग में परीक्षा केंद्र के बाहर खड़ी एक छात्रा की मां ने अपनी लड़की की पढ़ाई और परीक्षा को लेकर खुशी जतायी। “उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि बारह वर्षों की मेहनत रंग लाएगी, यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, जिससे मेरी बेटी का भविष्य तय होगा”।
गौरतलब है कि कॉलेज प्रवेश परीक्षा को सुचारू और सुरक्षित ढंग से आयोजित कराने के लिए देश भर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा के दौरान नकल, धोखाधड़ी आदि को रोकने के लिए पूरी व्यवस्था की गयी है। परीक्षा केंद्रों के आस-पास के क्षेत्रों में पुलिस द्वारा कड़ी सुरक्षा की जाती है, सड़क की गलियों को ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया जाता है। जबकि कई शहरों में वाहन चालकों को परीक्षा वाले इलाके में हॉर्न बजाने की अनुमति नहीं होती है, ताकि छात्रों की एकाग्रता में बाधा न पहुंचे। इस दौरान कुछ स्कूलों में, धोखाधड़ी को रोकने के लिए फेस रेकगनिशन का भी इस्तेमाल किया जाता है। कुल मिलाकर पूरे चीन में इस परीक्षा के सफल संचालन के लिए विभिन्न इंतजाम किए गए हैं।
बता दें कि पिछले दिनों चीनी उप प्रधानमंत्री तिंग स्वेस्यांग ने एग्ज़ाम में धोखाधड़ी के खिलाफ कठोर अभियान के महत्व पर बल देते हुए “सुरक्षित काओ खाओ” का आह्वान किया था। वहीं चीन से इंडिया की तुलना करें तो भारत में छात्रों के लिए काओ खाओ जैसी देशव्यापी एकीकृत परीक्षा नहीं होती है। लेकिन इंडिया में भी हर साल बड़ी संख्या में छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं। मेडिकल व इंजीनियरिंग से लेकर मैनेजमेंट आदि के एग्ज़ाम बहुत प्रतिस्पर्धी और कठिन माने जाते हैं। जो कि चीनी काओ खाओ एग्जाम से कम चुनौतीपूर्ण नहीं कहे जा सकते हैं।
जाहिर है कि दोनों देशों के छात्रों के ऊपर अच्छे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने का भारी दबाव रहता है। हालांकि यह भी सच है कि अच्छे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले छात्रों का उत्साह देखने लायक होता है। इस बार पूरे चीन में 1.335 करोड़ छात्रों ने अलग-अलग विषयों की परीक्षा देने के लिए पंजीकरण कराया है। यह एग्ज़ाम 7 जून को आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ। परीक्षा के पहले दिन देश के एग्ज़ाम सेंटरों में काफी चहल-पहल देखने को मिली।
बता दें कि पिछले साल 1.342 करोड़ छात्रों ने परीक्षा देने के लिए रिकार्ड संख्या में रजिस्ट्रेशन कराया था। हालांकि 2025 में इसके मुकाबले करीब 70 हज़ार की कमी आयी है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)