आजकल चीनी दुर्लभ मृदा धातु की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग है, लेकिन उसे पाना आसान नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय की नियमित प्रेस वार्ता में चीनी दुर्लभ मृदा का निर्यात संबंधी मुद्दा एक सरगर्म मामला बन गया है। इस संदर्भ में विभिन्न पक्ष चीन के रूख पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। ध्यान रहे कि इस अप्रैल के शुरू में चीनी वाणिज्य मंत्रालय और चीनी कस्टम्स ने विज्ञप्ति जारी कर कुछ मध्यम व भारी दुर्लभ मृदा के निर्यात पर नियंत्रण करने का फैसला किया। निर्यातकों को संबंधित कानूनों के मुताबिक सरकार के जिम्मेदार विभाग से परमिट लेने की जरूरत है। विज्ञप्ति में कहा गया कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा हित और अप्रसार की रोकथाम आदि अंतरराष्ट्रीय कर्तव्य निभाना है।
चीन विश्व में सबसे बड़ा दुर्लभ मृदा आपूर्तिकर्ता है और विश्व के मुख्य आर्थिक समुदाय चीन पर बहुत हद तक निर्भर हैं। मसलन अमेरिका की 70 प्रतिशत दुर्लभ मृदा चीन से आयातित होती है। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 80 प्रतिशत दुर्लभ मृदा मैगनेट चीन से आयात किया।
पिछले हफ्ते चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि चीन ने नियमों से मेल खाने वाले कुछ आवेदनों को मंजूरी दी है और आवेदन की पुष्टि कार्य निरंतर मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार बड़े देश के नाते चीन सिविल क्षेत्र में विभिन्न देशों की जायज मांग व चिंता का पूरा ख्याल करेगा। चीनी विदेश मंत्रालय ने भारतीय मीडिया के सवाल के जवाब में कहा कि हम संबंधित देशों और क्षेत्रों के साथ वार्ता व सहयोग मजबूत कर एक साथ वैश्विक सप्लाई चेन की स्थिरता की सुरक्षा करने को तैयार हैं।
दुर्लभ मृदा 17 धातु तत्वों का आम नाम है, जिसे हल्के,मध्यम व भारी तीन वर्गों में बांटा जाता है। इसका कृषि, उद्योग और सैन्य क्षेत्रों में व्यापक प्रयोग होता है। इसे उद्योग का विटामिन और नयी सामग्री की जननी कहा जाता है। आज वह हाई टेक व्यवसायों के विकास से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।
चीन के दुर्लभ मृदा धातु का भंडारण विश्व में पहले स्थान पर है। चीन में अब तक 4 करोड़ 40 टन दुर्लभ मृदा भंडारण का पता लगाया जा चुका है, जो विश्व के कुल भंडारण का 40 प्रतिशत है। खास बात है कि चीन की दुर्लभ मृदा की संपूर्ण किस्में होने के साथ भारी दुर्लभ मृदा संसाधन की स्पष्ट बढ़त है। भारी दुर्लभ मृदा सैन्य व स्पेस उद्योग में निर्णायक भूमिका निभाता है। चीनी लोगों को अपने प्रचुर दुर्लभ मृदा पर बहुत गर्व है। दिवंगत चीनी नेता तंग श्याओ फिंग ने कहा था कि मध्य पूर्व के पास तेल है, जबकि चीन के पास दुर्लभ मृदा है। हमें दुर्लभ मृदा कार्य को बखूबी अंजाम देना है।
कई दशकों की मेहनत से चीन विश्व के दुर्लभ मृदा क्षेत्र में सबसे मजबूत शक्ति बन गया है। खासकर इधर के कुछ सालों में चीन के सर्वोच्च नेता शी चिनफिंग के ख्याल और निर्देशन से चीनी दुर्लभ मृदा व्यवसाय का गुणवत्ता विकास तेजी से चल रहा है। मई 2019 में शी चिनफिंग ने दुर्लभ मृदा किंगडम के रूप में मशहूर दक्षिण चीन के क्वांगचो शहर का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दुर्लभ मृदा महत्वपूर्ण रणनीतिक संसाधन है औऱ अनवीकरणीय स्रोत भी है। हमें वैज्ञानिक व तकनीकी सृजन को मजबूत कर व्यावसायिक चेन को बढ़ाना और अतिरिक्त मूल्य उन्नत करना और पर्यावरण संरक्षण मजबूत कर हरित व सतत विकास पूरा करना चाहिए। जून 2023 में शी ने उत्तर चीन में स्थित महत्वपूर्ण दुर्लभ मृदा केंद्र पाओथो शहर का दौरा किया। उन्होंने बताया कि रणनीतिक संसाधन का लाभ उठाना और उसका संरक्षित विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रयोग और मानक प्रबंधन करना चाहिए। इसके साथ संसाधन के स्थल पर गहरे प्रोसेसिंग को मजबूत करना चाहिए ताकि रणनीतिक संसाधन व्यवस्था का अच्छा विकास हो।
अब चीन विश्व का सबसे बड़ा दुर्लभ मृदा उत्पादक है और सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता भी है। खास बात यह है कि चीन ने दुर्लभ मृदा के खनन, विभाजन व दोहन की अहम तकनीकों में महारत हासिल की है। चीन की दुर्लभ मृदा परिष्कृत प्रौद्योगिकी ने विश्व के अन्य देशों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। यह जान कर आप शायद हैरान होंगे कि चीन दुर्लभ मृदा का सबसे बड़ा आयातक भी है और अमेरिका चीन के प्रति दुर्लभ मृदा का सबसे बड़ा निर्यातक है। इसका एक मुख्य कारण यह है कि अमेरिका में परिष्कृत क्षमता की कमजोरी है और चीन के पास पूरे व्यावसायिक चेन का लाभ है। आंकड़ों के अनुसार, चीन में वैश्विक दुर्लभ मृदा की 89 प्रतिशत विभाजन क्षमता है और 90 प्रतिशत से अधिक परिष्कृत क्षमता है।
चीन एक शांतिप्रिय देश है और विश्व के अन्य देशों के साथ समान विकास और समान समृद्धि पूरा करने को तैयार है। चीन मानवता के साझे भविष्य वाले समुदाय के निर्माण में संलग्न है। दुर्लभ मृदा मुद्दे पर चीन निश्चिय ही विभिन्न देशों की जायज मांग पर ध्यान देगा, पर चीन इसकी बिल्कुल भी अनुमति नहीं देगा कि कोई चीनी दुर्लभ मृदा का इस्तेमाल कर चीन को नियंत्रित करे या उस पर प्रहार करे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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