Last Updated: November 4, 2026

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आपदा के बीच ‘फरिश्ता’ बनकर आया कुत्ता, मंडी जिले में अचानक कैसे बचाई 67 लोगों की जान?

July 8, 2025

आपदा के बीच ‘फरिश्ता’ बनकर आया कुत्ता, मंडी जिले में अचानक कैसे बचाई 67 लोगों की जान?

Siyathi Village Landslide Warning : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के स्याथी गांव में 30 जून की आधी रात को ऐसा कुछ हुआ, जिसने गांव के लोगों को एक नई ज़िंदगी दे दी। यह रात भूस्खलन और तबाही की थी, लेकिन एक पालतू कुत्ते की सतर्कता ने कई गांव के कई लोगों की जान बचा ली। दरअसल, गांव के निवासी नरेंद्र का पालतू कुत्ता घर की दूसरी मंजिल पर सो रहा था। आधी रात को उसे किसी खतरे का आभास हुआ और वह जोर-जोर से भौंकने लगा। उसकी आवाज सुनकर नरेंद्र की नींद खुल गई। नरेंद्र ने देखा कि उनके घर की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं और बारिश का पानी अंदर घुस रहा है। उन्होंने बिना समय गंवाए तुरंत घर से बाहर निकलने और दूसरों को सतर्क करने का फैसला किया।

पूरे गांव को जगाया, लोगों को निकाला बाहर

-नरेंद्र ने अपने पड़ोसियों के दरवाजे खटखटाए, उन्हें जगाया और घर खाली करने को कहा। गांव के लोग घबराए हुए थे, लेकिन नरेंद्र की बात मानकर जल्दी-जल्दी घर से बाहर निकल गए।

कुछ ही देर में हुआ भीषण भूस्खलन

-लोग जैसे-तैसे घरों से बाहर निकले ही थे कि थोड़ी देर में एक बड़ा भूस्खलन हुआ। मलबा पूरे गांव में फैल गया और करीब एक दर्जन मकान इसकी चपेट में आ गए।

67 लोगों की जान बची, गांव के ज्यादातर घर तबाह

-नरेंद्र और उसके कुत्ते की सतर्कता की वजह से गांव के 67 लोग सुरक्षित बच निकले। आज गांव में केवल 4-5 मकान ही खड़े हैं, बाकी सभी मिट्टी में दब गए हैं।

हिमाचल में बारिश और भूस्खलन से अब तक भारी नुकसान

पूरा हिमाचल प्रदेश इन दिनों भारी बारिश और भूस्खलनों से जूझ रहा है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 225 घर पूरी तरह टूट गए हैं। 243 पशुशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। 14 पुल टूट चुके हैं, दर्जनों सड़कें बंद पड़ी हैं। 215 मवेशियों की मौत हुई है। 78 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से 50 मौतें भूस्खलन और बारिश की वजह से हुईं हैं।

अब तक ₹700 करोड़ का नुकसान

-राज्य सरकार ने बताया कि अब तक का कुल नुकसान ₹700 करोड़ से ज्यादा हो चुका है।

जानवर भी होते हैं सच्चे साथी

इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि जानवर भी मुश्किल समय में इंसानों के लिए कितने मददगार और संवेदनशील हो सकते हैं। स्याथी गांव के लोग आज भी उस कुत्ते की भौंकने की आवाज को याद करते हैं, जिसने उन्हें समय रहते चेतावनी देकर बचा लिया।

 

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