नेशनल डेस्क: रैगिंग नेशनल डेस्क: रैगिंग रोकने को लेकर यूजीसी ने फिर से गाइडलाइन जारी कर दी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का कहना है कि व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए अगर किसी जूनियर विद्यार्थी को परेशान किया जाता है तो इसे रैगिंग माना जाएगा। ऐसी स्थिति में रैगिंग विरोधी नियमों के तहत एक्शन लिया जाएगा।
यूजीसी ने इस बाबत संबंधित शिक्षण संस्थानों को भी आदेश जारी कर निगरानी करने को कहा है। यूजीसी ने कहा है कि देखने में आया है कि वरिष्ठ छात्र अनौपचारिक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर जूनियर्स को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करते हैं। यह रैगिंग है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। दोषी छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
Harassing juniors through informal WhatsApp groups to be treated as ragging: UGC#UGC https://t.co/sBu5bIso9T
— OTV (@otvnews) July 9, 2025
यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों को चेतावनी दी है कि यदि परिसरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होगी। छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है। संबंधित संस्थानों की सब्सिडी रोकने का निर्णय भी लिया जा सकता है। रैगिंग विरोधी मापदंडों को हर हाल में लागू करना होगा।
यूजीसी की एडवाइजरी में अन्य घटनाओं का हवाला भी दिया गया है। जूनियर छात्रों को सीनियर्स की ओर से धमकी दी जाती है कि अगर उनकी बातें नहीं मानी गईं तो सिर मुंडवाने के साथ ही बहिष्कार करवा दिया जाएगा। रैगिंग के नाम पर छात्रों को लंबे समय तक जगाने जैसा काम भी किया जाता है। इससे छात्रों शारीरिक के साथ-साथ मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। यूजीसी के अनुसार इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकते।
यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी यूजीसी कई दफा रैगिंग को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। रैगिंग को आयोग शर्मनाक करार दे चुका है। शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न ही नहीं, अब विद्यार्थियों को क्षेत्र, भाषा, रंग, जाति, लिंग, धर्म, आर्थिक पृष्ठभूमि और जन्म स्थान के आधार पर भी तंग नहीं किया जा सकता। ऐसा करना भी रैगिंग माना जाएगा। विद्यार्थियों को ‘बिहारी’, ‘चिंकी-पिंकी’ और ‘जाट’ जैसे शब्दों से भी नहीं पुकारा जा सकता।
मेष: दिन शुभ रहेगा...