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भारत-चीन साझेदारी से बन सकता है बेहतर विश्व: हिमाद्रिश सुवन

July 18, 2025

भारत-चीन साझेदारी से बन सकता है बेहतर विश्व: हिमाद्रिश सुवन

हाल ही में चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित वैश्विक सभ्यता संवाद मंत्रिस्तरीय बैठक में दुनियाभर के कई देशों के नेताओं, विचारकों और विशेषज्ञों ने शिरकत की। इस संवाद का उद्देश्य था अलग-अलग सभ्यताओं के बीच संवाद, आपसी समझ और पारस्परिक सीख को बढ़ावा देना। बैठक में यह बात प्रमुखता से उठी कि वैश्विक शांति, सहयोग और विकास तभी संभव है जब हम एक-दूसरे की संस्कृति, विचार और जीवन दृष्टिकोण का सम्मान करें। एक सभ्यता को सर्वोपरि मानना या उसे दूसरों पर थोपना न केवल अनुचित है, बल्कि विविधता की ताकत को नकारना भी है।

इस अवसर पर चाइना मीडिया ग्रुप के CGTN हिन्दी से बातचीत में भारतीय युवा संघ के अध्यक्ष और सामाजिक-राजनीतिक नेता हिमाद्रिश सुवन ने इस पहल को “बहुत ही समयानुकूल और जरूरी” बताया। उन्होंने कहा कि यह संवाद ऐसे दौर में हो रहा है जब दुनिया अनेक संकटों का सामना कर रही है, चाहे वह देशों के बीच टकराव हो, युद्ध की स्थिति हो या विचारों के आदान-प्रदान में गिरावट। ऐसे समय में सभ्यताओं के बीच परस्पर संवाद बेहद जरूरी हो जाता है। हिमाद्रिश सुवन ने बीजिंग में हुए इस संवाद को वैश्विक शांति और सहयोग को प्रोत्साहित करने वाला एक अहम मंच बताया। उन्होंने भारत और चीन के गहरे ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों, युवाओं की निर्णायक भूमिका और सभ्यताओं के बीच सहयोग की ज़रूरत पर भी बल दिया।

उनके अनुसार भारत और चीन अगर मिलकर काम करें, तो सिर्फ एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया में शांति और समृद्धि की राह आसान हो सकती है। सुवन ने चीन सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए ‘मानव जाति के लिए साझा भविष्य वाला समुदाय’ की अवधारणा को भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के समकक्ष बताया। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि इस संवाद में विश्व के हर कोने से लोग शामिल हुए और सभी ने एक साझा भविष्य के लिए मिलकर काम करने का संदेश दिया। हिमाद्रिश सुवन का मानना है कि विभिन्न सभ्यताओं से सीखने की प्रक्रिया दुनिया में शांति और प्रगति लाने में मददगार हो सकती है।

उनका कहना है कि मतभेदों के बावजूद, “आखिरकार हम सब इंसान हैं,” इसलिए संवाद और साझा मंच बनाना ज़रूरी है। उन्होंने एक ऐसे ‘सभ्यता संस्थान’ की स्थापना का सुझाव दिया जहाँ हर देश, हर विचारधारा और हर समाज के प्रतिनिधि मिलकर विचार साझा कर सकें। उन्होंने ज़ोर दिया कि हर सभ्यता से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। जो श्रेष्ठ मूल्य और परंपराएं हैं, उन्हें अपनाया जाना चाहिए, और जो नकारात्मकताएं हैं, उनसे दूरी बनाई जानी चाहिए। सुवन के अनुसार, ऐसे संवाद सिर्फ चीन में ही नहीं, दुनिया भर में होने चाहिए ताकि जागरूकता फैले कि हमें आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर दुनिया देकर जानी है।

सुवन ने 2020 में लिखे अपने लेख का हवाला देते हुए कहा कि “भारत और चीन में दुनिया के किसी भी दो देशों की तुलना में सबसे ज्यादा समानताएं हैं।” उन्होंने चीनी लालटेन महोत्सव को भारतीय दिवाली और ड्रैगन बोट फेस्टिवल को ओणम जैसा बताया, यह बताते हुए कि सांस्कृतिक और शैक्षिक मूल्यों में दोनों देशों के बीच अद्भुत समानता है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत-चीन का आपसी आदान-प्रदान 2 हजार साल से अधिक पुराना है- जैसे ह्वेनसांग की भारत यात्रा या बौद्ध धर्म का चीन पहुंचना। उनके मुताबिक, यह रिश्ता इतना गहरा और विस्तृत है कि अगर इसे किताब की तरह पढ़ा जाए, तो हजारों साल लग जाएंगे।

हिमाद्रिश सुवन ने कहा, “भारत और चीन को साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है, क्योंकि जब ये दोनों मिलकर बोलेंगे, तो पूरी दुनिया सुनेगी।” उन्होंने इसे दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए भी अहम बताया और कहा कि इससे विकासशील देशों को लाभ होगा और वैश्विक शांति को मज़बूती मिलेगी। उन्होंने युवाओं को वैश्विक सभ्यता संवाद का सबसे अहम स्तंभ बताया। उनके मुताबिक, किसी भी नई पहल की सफलता युवाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं। युवाओं को उन्होंने “सबसे खुले दिमाग वाले लोग” कहा, जिनके पास पुराने विचारों का बोझ नहीं होता। वे न सिर्फ अपने लिए, बल्कि समाज और विश्व के लिए सोचते हैं।

सुवन ने भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के दृष्टिकोण का उल्लेख किया और गर्व के साथ बताया कि वे इस मंत्रीस्तरीय संवाद में “चीन सरकार द्वारा आमंत्रित एकमात्र युवा वक्ता” थे। उन्होंने कहा, “यह इस बात का संकेत है कि चीन अब युवा शक्ति को पहचान रहा है।” उन्होंने वर्ष 2025 को भारत-चीन संबंधों के लिए एक “बहुत ही विशेष अवसर” करार दिया, क्योंकि इस साल दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। उनके अनुसार, “यह एक बेहतरीन मौका है जब हम अपने इतिहास को फिर से देखें, क्योंकि यह रिश्ता बड़ी मेहनत से बना है।”

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप (CGTN हिन्दी), बीजिंग)

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