Sudan News: अफ्रीकी देश सूडान में पिछले साल से गृहयुद्ध चल रहा है। यह लड़ाई सेना और एक विद्रोही समूह ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेस’ (RSF) के बीच हो रही है। लेकिन यहां सिर्फ लड़ाई से नहीं, बल्कि भुखमरी और अकाल से भी हजारों लोग मर रहे हैं। खाने की इतनी कमी है कि लोग अपनी भूख मिटाने के लिए घास, जंगली पौधे और यहां तक कि कोयला तक चूसने को मजबूर हैं।
बच्चों को घास उबालकर पिलाई जा रही है
एक रिपोर्ट के अनुसार, सूडान के कई हिस्सों में लोग जंगली पौधों को नमक के साथ उबालकर बच्चों को दे रहे हैं, ताकि वे भूख से तड़पें नहीं। “खदीजा कोरो” नाम का एक पौधा लोगों के लिए सहारा बन गया है, जिसे उबालकर खाया जा रहा है।

रिटायर्ड शिक्षक ने लिखा घास के लिए धन्यवाद गीत
60 साल के एक रिटायर्ड स्कूल टीचर ने इस पौधे पर एक कविता भी लिखी है। उन्होंने कहा कि यह घास उनके लिए एक मरहम जैसी है, जिसने उन्हें भूख से मरने से बचाया है।
2.5 करोड़ लोग गंभीर भूख से जूझ रहे
सूडान की लगभग आधी आबादी करीब 24.6 मिलियन (2.5 करोड़) लोग गंभीर भूख का सामना कर रहे हैं। अप्रैल 2023 से शुरू हुए इस युद्ध ने हालात बद से बदतर बना दिए हैं। अब तक 20,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
1.3 करोड़ लोग घर छोड़ने को मजबूर
इस गृहयुद्ध की वजह से 1 करोड़ 30 लाख लोग अपने घर-गांव छोड़कर भाग चुके हैं। कुछ लोग शिविरों में रह रहे हैं, जबकि कई लोगों को रहने की जगह भी नहीं मिली है।

खाने की चीजों के दाम बहुत बढ़ गए हैं
युद्ध के कारण बाजारों में खाना मिलना मुश्किल हो गया है। दाम इतने बढ़ गए हैं कि आम लोगों के लिए खाना खरीदना नामुमकिन हो गया है। खेती की ज़मीनें भी नष्ट हो गई हैं, जबकि एक समय सूडान को ‘विश्व का अन्न भंडार’ माना जाता था।
कई इलाकों में हालात बेहद खराब
दारफुर, कोर्डोफन, और नुबा पर्वत जैसे इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां राहत पहुंचाना लगभग नामुमकिन हो गया है क्योंकि विद्रोही रास्तों को बंद कर रहे हैं और लूटपाट भी हो रही है।
एक समय का खाना और वो भी कोयले के साथ
उत्तर दारफुर के कुछ लोगों को दिन में सिर्फ एक बार खाना नसीब हो रहा है वह भी सिर्फ बाजरे का पानीदार दलिया। कुछ लोगों ने पेट भरने के लिए कोयला चूसना शुरू कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र ने की युद्धविराम की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सूडानी सेना प्रमुख जनरल अब्देल-फतह बुरहान से फोन पर बातचीत करके एक हफ्ते के युद्धविराम की अपील की, ताकि ज़रूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके। सेना ने सहमति दी है, लेकिन यह साफ नहीं है कि विद्रोही (RSF) इससे सहमत होंगे या नहीं।
सरकार इनकार कर रही, लेकिन हालात बेहद खराब
सूडान के कृषि मंत्री ने एक इंटरव्यू में कहा कि देश में अकाल जैसी स्थिति नहीं है। लेकिन रिपोर्टें बता रही हैं कि RSF के कब्जे वाले इलाकों में लोगों के पास खाने को कुछ भी नहीं है।
17 जिले अकाल की चपेट में
विश्व खाद्य कार्यक्रम की प्रवक्ता ने बताया कि गजेरा, दारफुर, खार्तूम और आसपास के 17 जिले गंभीर अकाल से जूझ रहे हैं। इनमें से 17 लाख लोग सिर्फ उन्हीं इलाकों में रह रहे हैं जो सबसे ज्यादा खतरे में हैं।
रास्ते बंद, परिवारों से मिलना भी मुश्किल
RSF ने कई सड़कें बंद कर दी हैं, जिससे लोग अपने घर या परिवार वालों से नहीं मिल पा रहे। चारों ओर डर, हिंसा और लूटपाट का माहौल है। ऐसे में लोग सिर्फ अपने छोटे इलाके तक सीमित हो गए हैं और खाना ढूंढना उनके लिए दिनभर की लड़ाई बन चुका है।
आखिर क्यों सेना दो गुटों से लड़ रही है
सूडान में सेना दो गुटों से लड़ रही है, एक RSF और दूसरा ‘पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ’ (SPLM-N)। इन दोनों की वजह से आम लोगों के लिए खाना, पानी और दवा जैसी बुनियादी चीजें मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...