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इतिहास को अपने में समेटे हुए है हांगचो का लेइफंग पगोडा

July 27, 2025

इतिहास को अपने में समेटे हुए है हांगचो का लेइफंग पगोडा

चीन के हर प्रांत और शहर में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक झलक ज़रूर मिलती है। जो सीधे तौर पर्यटन के साथ जुड़ती है। चच्यांग प्रांत के हांगचो की बात करें तो यहाँ पर एक प्रसिद्ध पगोडा है। लेइफ़ंग नाम का यह पगोडा न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि प्राकृतिक संरक्षण का भी एक अहम उदाहरण है। यह हांगचो में वेस्ट लेक के दक्षिण में सनसेट हिल पर स्थित एक पाँच मंजिला आठ एंगल वाला टावर है। बताया जाता है कि मूल रूप से इसका निर्माण 975 ईस्वी में किया गया था। लेकिन वर्ष 1924 में यह ढह गया था, लेकिन 2002 में इसका पुनर्निर्माण किया गया। इसके बाद से यह एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण बन चुका है। यहाँ पर बड़ी संख्या में लोग घूमने और पगोडा के बारे में जानकारी हासिल करने आते हैं।                

इस टॉवर पर पहुँचने के बाद एक अलग ही अनुभूति होती है। बता दें कि टावर की विभिन्न मंजिलों से वेस्ट लेक और शहर का बेहद खूबसूरत नज़ारा दिखता है। यहाँ आने वाले लोग तस्वीरों और वीडियो के ज़रिए सुंदर दृश्य को मोबाइल या कैमरे में क़ैद करते हैं। जो किसी यादगार अनुभव से कम नहीं होता। इस पगोडा के आसपास के इलाक़े में बहुत हरियाली है, जिसकी वजह से यहाँ आने पर गर्मी का अहसास नहीं होता। क्योंकि झील और तमाम पेड़-पौधों के कारण शीतल हवाएँ बहती हैं। एक संरक्षित सांस्कृतिक विरासत इकाई के रूप में, वेस्ट लेक के दस दृश्य- लेइफ़ंग सनसेट में सनसेट हिल, लेइफ़ंग पगोडा, शाही स्मारक और प्रांगण व अन्य इमारतें शामिल हैं। इतिहास का उल्लेख करें तो मूल पगोडा का निर्माण 975 ईस्वी में, पाँच राजवंश और दस राज्य काल के दौरान, वुयू के सम्राट चोंगयी (छियान छू के आदेश पर, उनकी प्रिय उप पत्नी, हुआंग के लिए किया गया था। लेइफ़ंग पगोडा एक अष्टकोणीय, पाँच मंजिला संरचना थी, जो ईंटों और लकड़ी से बनाई गई, जिसका आधार ईंटों से निर्मित किया गया था। 

बताते हैं कि मिंग राजवंश के दौरान, जापानी समुद्री डाकुओं ने हांगचो पर हमला किया। पगोडा में हथियार होने का संदेह होने पर, उन्होंने इसके लकड़ी के हिस्सों को जला दिया, जिससे केवल ईंटों का ढाँचा ही बचा। जिसे वेस्ट लेक के मिंग चित्रों में देखा जा सकता है।चीन गणराज्य के 13वें वर्ष (1924) में, 25 सितंबर को लेईफ़ंग पगोडा की ईंटों वाली मीनार जीर्ण-शीर्ण हो गई और केवल खंडहर ही बचे। ऐसे में अक्टूबर 1999 में, प्रांतीय और नगरपालिका सरकार ने पुराने पगोडा के खंडहर के ऊपर पगोडा का पुनर्निर्माण करने का निर्णय लिया। नया पगोडा 25 अक्टूबर 2002 को खुला। यह 1400 टन स्टील और 200 टन तांबे से बना है। इसमें चार दर्शनीय स्थल लिफ्ट और एयर कंडीशनिंग, टीवी व स्पीकर जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। लोगों को पगोडा के बेस तक ले जाने के लिए दो स्वचालित एस्केलेटर हैं।हालांकि पगोडा का मूल आधार और भूमिगत कक्ष में खोजी गई कलाकृतियाँ अच्छी स्थिति में हैं। 

(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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