संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (यूएनओपीएस) के कार्यकारी निदेशक जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा ने हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) को एक विशेष साक्षात्कार दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय शासन में चीन की भूमिका अपरिहार्य है।
जॉर्ज मोरेरा दा सिल्वा ने परिचय देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में यूएनओपीएस की मुख्य ज़िम्मेदारी परियोजना कार्यान्वयन है, और उसका काम परियोजना कार्यान्वयन को अग्रिम पंक्ति में बढ़ावा देना है। यह बुनियादी ढांचे के निर्माण, खरीद और परियोजना प्रबंधन में काम करती है, जैसे कि अस्पताल, स्कूल, ऊर्जा सुविधाएं, नवीकरणीय ऊर्जा सुविधाएं, ट्रांसमिशन लाइनें, सड़कें बनाना या फार्मास्यूटिकल्स की खरीद करना।
इन्टरव्यू में दा सिल्वा ने कहा कि आज विश्व की एक-चौथाई जनसंख्या संघर्ष की स्थिति में रहती है, संघर्ष और हिंसा का विस्तार चिंताजनक है। हम एक जटिल संकट का सामना कर रहे हैं: एक संकट समाप्त होने से पहले ही दूसरा आ जाता है। जो देश बाढ़, सूखा, चक्रवात और तूफान जैसे चरम मौसम का सामना कर रहे हैं, वे दीर्घकालिक संघर्ष और अस्थिरता में भी फंसे हुए हैं। इसलिए, हमें रोकथाम को प्राथमिकता देनी चाहिए और अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए, हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करनी चाहिए, और जहाँ भी संभव हो, विकास को बढ़ावा देना चाहिए।
इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ है। संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में से एक होने के नाते, चीन ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र के मामलों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में चीन की भूमिका का मूल्यांकन करते हुए दा सिल्वा ने कहा कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय शासन में चीन की एक अपरिहार्य भूमिका है। जलवायु परिवर्तन से लेकर विकास सहयोग तक, कई क्षेत्रों में चीन ने सकारात्मक भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि बहुपक्षवाद के लिए चीन का अटूट समर्थन महत्वपूर्ण है। आज दुनिया को वैश्विक समन्वय तंत्र को मज़बूत करने और बहुपक्षीय सहयोग प्रणाली को पुनर्जीवित करने की तत्काल आवश्यकता है। इस संदर्भ में, चीन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चीन के साथ सहयोग की चर्चा करते हुए, दा सिल्वा ने कहा कि चीन हमेशा से वैश्विक विकास प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है और कई वर्षों से अफ्रीका समेत कई क्षेत्रों के विकासशील देशों का सक्रिय रूप से समर्थन करता रहा है और विकास सहयोग को बढ़ावा देता रहा है। वैश्विक विकास पहल और “बेल्ट एंड रोड” पहल, दोनों ही विकासशील देशों के साथ साझेदारी को गहरा करने और समान विकास को बढ़ावा देने के चीन के प्रयासों की ठोस अभिव्यक्तियाँ हैं।
दा सिल्वा जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की रणनीतिक दृष्टि और दृढ़ संकल्प के प्रशंसक हैं। उन्होंने कहा कि हरित अर्थव्यवस्था, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत गतिशीलता में चीन की महत्वपूर्ण प्रगति न केवल देश के लिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही, चीन बहुपक्षवाद का दृढ़ता से समर्थन करता है और सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा और वैश्विक जलवायु एजेंडा में सक्रिय रूप से भाग लेता है। उनका पूरा विश्वास है कि चीन 2060 से पहले कार्बन तटस्थता हासिल करने में सक्षम है। दा सिल्वा के विचार में नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास में चीन के प्रयासों और उपलब्धियों ने एक स्पष्ट और सकारात्मक संकेत भेजा है, जो वैश्विक जलवायु शासन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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