
मुंबई (फरीद शेख): डायरेक्टर अरुण गोपालन दर्शकों के लिए तेहरान के रूप में एक ऐसी फिल्म लेकर आए हैं, जो लंबे समय तक सभी के साथ रहने वाली है। फिल्म की दमदार कहानी, उसके डायलॉग्स, से लेकर कास्ट और किरदार तक कमाल के हैं। वहीं, फिल्म के मेकर्स मैडॉक फिल्म्स और बेक माई केक फिल्म्स ने इस तरह की कहानी को दर्शकों के लिए लाकर तारीफ पाने वाला काम किया है। ऐसे में चलिए इस फिल्म के रिव्यू पर एक नजर डालते हैं और बताते हैं कौन सी बातें बनाती हैं इसे मस्ट वॉच फिल्म!
कहानी दिल्ली में हुए जोरदार धमाके के साथ शुरू होती है, जिसने पूरे इलाके में डर और हलचल मचा दी। इस हादसे में कई लोग घायल हो जाते हैं और एक फूल बेचने वाली लड़की की जान चली जाती है। DCP राजीव कुमार (जॉन अब्राहम) उस लड़की को पहचानते हैं, और यही घटना उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस मामले में झोंक देती है। यह हमला उनके लिए केवल पेशेवर जिम्मेदारी नहीं बल्कि दिल को छू जाने वाला अनुभव बन जाता है, जो पूरी कहानी की बुनियाद तैयार करता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, राजीव सरकारी सिस्टम और गहरी राजनीतिक खेलों से बाहर निकल कर अपने तरीके से कार्रवाई करता है। यह सफर दर्शकों को एक ऐसे मिशन में ले जाता है, जहां इंसानियत, साहस और जिम्मेदारी के फैसले उसकी राह तय करते हैं।
अब आपके मन में यह सवाल बन रहे होंगे कि क्या राजीव अपने मकसद में कामयाब होगा? उसकी मदद कौन करेगा और आखिरकार वह अपने असली दुश्मन का सामना कैसे करेगा? और इन सभी सवालों के जवाब पाने के लिए आपको यह रोमांचक और दिलचस्प थ्रिलर देखनी होगी।
अगर एक्टिंग की बात करें तो, जॉन अब्राहम इस फिल्म में अपने ठोस अंदाज और प्रेजेंस से हर सीन में छा जाते हैं। उनके चेहरे और आंखों की भावनाएं दर्शाती हैं कि वह इस केस को सिर्फ काम के तौर पर नहीं बल्कि दिल से निभा रहे हैं। मानुषी छिल्लर, SI दिव्या राणा के रोल में, भले ही स्क्रीन पर कम नजर आएँ, लेकिन कहानी में उनकी मौजूदगी काफी असर छोड़ती है। नीरू बाजवा शैलजा के किरदार में मजबूती और स्टाइल का सही मेल दिखाती हैं, जो फिल्म के मूड को पूरी तरह से पकड़ता है। हादी खजानपुर अपने रोल अशरफ खान में डर और तनाव को नेचुरल तरीके से पेश करते हैं, बिना किसी ओवर‑एक्टिंग के। कुल मिलाकर, फिल्म की कास्ट अपनी परफॉर्मेंस से सबको अपने साथ बांधे रखती है और कहानी को और मजबूती देती है।
फिल्म की स्क्रिप्ट कैची और अपने साथ बांधे रखने वाली है। रितेश शाह, आशीष पी. वर्मा और बिंदनी कारिया ने अपने काम को खूबसूरती से अंजाम दिया है और फिल्म के हर एक परत को अच्छी तरह से समझने लायक लिखा है। फिल्म के एक्शन सींस असली होने का अनुभव देते हैं और यह चीज दर्शकों को जरूर पसंद आने वाली है।
कैमरा वर्क की बात करें तो लेवगेन गुब्रेबको और एंड्री मेनेजेस ने दिल्ली से लेकर अबू धाबी तक के लोकेशन को बेहद खास अंदाज में कैमरे में कैद किया है। वहीं फिल्म की कहानी को केतन सोधा के म्यूजिक ने और मजबूती दी है। जबकि, एडिटिंग के मामले में अक्षरा प्रभाकर ने तारीफ ए काबिल काम किया है।
तेहरान के प्रोड्यूसर्स, मैडॉक फिल्म्स और बेक माई केक फिल्म्स, ने फिल्म को सिर्फ एक थ्रिलर बनाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसकी गहराई में इंसानियत, जिम्मेदारी और व्यक्तिगत भावनाओं को भी पेश किया है। उनका विज़न साफ है, कहानी के हर पहलू को असल और संवेदनशील बनाए रखना, ताकि दर्शक फिल्म को सिर्फ स्क्रीन पर न देखें, बल्कि किरदारों और घटनाओं को महसूस करें। उन्होंने बड़े पैमाने पर लोकेशंस, स्क्रिप्ट और तकनीकी टीम के काम को मिलाकर फिल्म को एक शानदार सिनेमाई अनुभव बनाया है।
इस वीकेंड अगर आप कुछ नया, अलग और देश से जुड़ा देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए बनीं है, जो अब ज़ी5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है।
दैनिक सवेरा टाइम्स न्यूज मीडिया नेटवर्क इस फिल्म को 4 स्टार रेटिंग देता है।
फिल्म-तेहरान
डायरेक्टर- अरुण गोपालन
कास्ट – जॉन अब्राहम, नीरू बाजवा, मानुषी छिल्लर, हादी खजानपुर
समय – 118 मिनट
रेटिंग- 4
मेष: दिन शुभ रहेगा...