नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आज एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। राजधानी के विकास कार्यों में तेजी और पारदर्शिता लाने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे ‘विकसित दिल्ली’ के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर बताया और कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन के आदर्श वाक्य से प्रेरित है।
अभी तक पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग सेवाओं के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के कैडर पर निर्भर था। विभाग के 3214 स्वीकृत पदों पर नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती रही है, जिसके कारण दिल्ली सरकार को समय पर काम कराने और प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप निर्णय लेने में कठिनाई होती थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, बीते 30 वर्षों से लंबित इस विषय पर अब निर्णायक कदम उठाया गया है। नए कैडर से दिल्ली सरकार को अपने स्तर पर इंजीनियरों की सीधी भर्ती करने और रिक्त पद भरने का अधिकार मिलेगा। इससे राजधानी को एक विशेषीकृत और जवाबदेह इंजीनियरिंग कार्यबल मिलेगा, जो स्थानीय अनुभव से संपन्न होगा और लंबे समय तक प्रतिबद्ध रह सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विभागीय इंजीनियरों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। पहले किसी गड़बड़ी की स्थिति में अधिकारी ट्रांसफर लेकर बच निकलते थे, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा। सरकार के अनुसार, इस पहल से दिल्ली में नया सचिवालय, 11 जिलों में मिनी सचिवालय, मंडियां, खेल परिसर, कार्यालय और अन्य ढांचागत परियोजनाओं का निर्माण तेजी से हो सकेगा। इससे सड़कों, पुलों और भवनों जैसी परियोजनाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा। कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि नए कैडर की संरचना और कार्यप्रणाली तय करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी।
प्रारंभिक चरण में इच्छुक सीपीडब्ल्यूडी अधिकारी इसमें शामिल हो सकेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अन्य भर्ती प्रक्रियाएं भी अपनाई जाएंगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विश्वास जताया कि यह फैसला दिल्ली सरकार को आत्मनिर्भर, उत्तरदायी और दूरदर्शी बनाने के साथ ही राजधानी को एक विश्वस्तरीय शहर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
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