Last Updated: October 22, 2026

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GST 2.0: किसे फायदा, किसे नुकसान? आर्थिक विशेषज्ञों ने क्या कहा?

September 6, 2025

GST 2.0: किसे फायदा, किसे नुकसान? आर्थिक विशेषज्ञों ने क्या कहा?

GST 2.0: जीएसटी में कटौती केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण फैसला है। जीएसटी में बदलाव से जनता को स्वास्थ्य बीमा के मामले में लाभ हुआ है और उद्यमियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया सरल हुई है। अर्थशास्त्री रवींद्रनाथ कौशिक ने वीका वेबसाइट के साथ जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर ज़ोर देकर भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना है।

जीएसटी में बदलावों को लेकर लोगों में कुछ भ्रम है, एक अर्थशास्त्री के तौर पर आपकी क्या राय है? जवाब: (रवींद्रनाथ कौशिक): जीएसटी 2.0, जीएसटी का अगला चरण है

जो केंद्र सरकार ने 2017 के बाद लिया है। यह भी आर्थिक मूल्य तटस्थता में सुधार के लिए एक बड़ा, बड़ा फैसला है। केंद्र सरकार ने ऐसा करने की दूरदर्शिता बहुत पहले ही दिखा दी थी। जीएसटी की शुरुआत में कई व्यवसाय चल रहे थे। शुरुआत में, लगभग 53 लाख जीएसटी के दायरे में पंजीकृत थे। जीएसटी के पहले तीन महीनों में, इसकी संख्या बढ़कर 67 लाख हो गई। अब यह संख्या 1.6 करोड़ को पार कर गई है। जीएसटी लागू होने के बाद से, व्यापारियों को भी जीएसटी के दायरे में लाने की मंशा थी। यह संख्या आगे और बढ़ने की संभावना है। केंद्र सरकार ने एक अच्छा फैसला लिया है।

जीएसटी में बदलाव एक अच्छा फैसला है । पहले कई व्यापारी ऐसे थे जिन पर जीएसटी नहीं लगता था। जिन पर जीएसटी नहीं लगता था और जिन पर लगता था, उनके बीच बड़ी प्रतिस्पर्धा थी। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे खत्म करने के लिए भी कदम उठाए हैं। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। अगर इस समय जीएसटी में बदलाव की वजह देखें तो जब अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाया तो कुछ उद्योगों पर इसका बुरा असर पड़ा। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने का असर भारत पर पड़ सकता है, ऐसे में अभी सही समय है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के दौरान कहा था कि कारोबार में घरेलू सामान के इस्तेमाल से भारतीय अर्थव्यवस्था को उबरने में मदद मिलेगी। इसी के अनुरूप जीएसटी में बदलाव संभव होने के संकेत भी बढ़ गए हैं।

केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में अचानक किए गए बदलाव का देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?

जीएसटी में बदलाव से देश की आर्थिक स्थिति पर नज़र डालें तो शेयर बाज़ार में सूचकांकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ा है। साथ ही, मुद्रास्फीति के बारे में, आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत रह सकती है, जिसका अर्थ है कि देश की अर्थव्यवस्था सकारात्मक वृद्धि की ओर बढ़ रही है। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां ​​भी भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की बात कर रही हैं।

जीएसटी में बदलाव से उद्यमियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

जीएसटी परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया है कि जीएसटी में बदलावों के चलते उद्यमियों का पंजीकरण तीन दिन के भीतर लागू कर दिया जाएगा। छोटे उद्यमियों के रिफंड के संबंध में भी इसे जल्द से जल्द लागू करने का निर्णय लिया गया है। सेवा कर के मामले में उद्यमियों को कुछ हद तक नुकसान हो सकता है। चूँकि जीएसटी के नए बदलावों के कारण आईटीसी का दावा करना मुश्किल हो सकता है, इसलिए उन्हें अपना व्यवसाय बदलना पड़ सकता है।

बदली हुई जीएसटी व्यवस्था के कारण उपभोक्ताओं को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?

जीएसटी में बदलाव से जनता को काफी फायदा हुआ है। स्वास्थ्य बीमा के मुद्दे पर कई बार चर्चा हुई है। कई राज्यों की तरफ से यह आवाज उठी थी कि स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी नहीं लगाया जाना चाहिए। इसी के तहत केंद्र सरकार ने अब स्वास्थ्य बीमा को जीएसटी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। यह बीमा कंपनियों के लिए एक चुनौती है, फिलहाल सवाल यह है कि क्या वे इनपुट प्रीमियम में बढ़ोतरी करेंगी। कुछ बीमा कंपनियां 100 फीसदी क्लीयरेंस देती हैं। ऐसी कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती आ सकती है। उदाहरण के लिए, अगर जीवन बीमा पर 5,000 रुपये का शुल्क लगता है और अगर इसे बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दिया जाता है, तो जीएसटी उतना ही लगेगा जितना वे दे रही थीं। यह फिलहाल कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। लेकिन उपभोक्ताओं के लिए भी यह एक तरह का असमंजस है। उपभोक्ता भी चिंतित हैं कि कहीं वे दरें बढ़ा तो नहीं देंगी।

यह अच्छी बात है कि जीएसटी में कृषि क्षेत्र के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं। लेकिन अगर कंपनियों के लिए जीएसटी कम किया गया और दर बढ़ाई गई, तो किसानों पर फिर से मार पड़ेगी। यहाँ सेवा कर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा कि अगर दर बढ़ाई गई तो क्या उपाय लागू होंगे।

जीएसटी में सबसे बड़े कर बदलाव, ‘पाप कर’ का क्या असर होगा?

‘पाप कर’ को 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है । तंबाकू उत्पादों पर इसे बढ़ाया गया है। ऐसी धारणा है कि अगर शराब और कई अन्य उत्पादों पर कर बढ़ा दिया गया, तो लोग इन्हें खरीदना बंद कर देंगे। तंबाकू और अन्य उपभोग के स्वास्थ्य प्रभावों से अधिकांश लोग प्रभावित होते हैं। इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है। लेकिन इसे कुछ हद तक रोकने के उद्देश्य से इसे लाया गया है। कारों, यानी महंगी कारों पर पहले से ही उपकर था, और अब इसे भी 40 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है।

जीएसटी प्रणाली में व्यापक बदलाव के संबंध में आप लोगों को क्या सुझाव देना चाहेंगे?
भारत की आर्थिक स्थिति इस समय अच्छी है। सभी देशों की तुलना में हमारा देश बहुत तेज़ी से विकास कर रहा है। अगर हमें अपने देश को और विकसित करना है, तो हमें घरेलू उत्पादों पर अधिक निर्भर रहना होगा। हमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की शिक्षा के अनुसार आत्मनिर्भरता की राह पर चलना होगा। दुनिया में भारत का बाज़ार बहुत बड़ा है। हम अपनी ताकत जानते हैं। हमें अपने छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाना चाहिए। मुझे लगता है कि अगर हम अपने उत्पादों का इस्तेमाल करेंगे तो देश की अर्थव्यवस्था को भी बहुत फ़ायदा होगा।

 

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