
जम्मू/ नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज जम्मू में दौरा कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायज़ा लिया। इस दौरान उन्होंने नष्ट हुई फसलों का निरीक्षण किया और खेतों में बाढ़ से आई रेत की समस्या को लेकर भी किसानों एवं अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। शिवराज सिंह ने यहां बाढ़ प्रभावित किसानों से संवाद करते हुए राहत के लिए अनेक घोषणाएं की।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों को हरसंभव राहत प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आशीर्वाद और उनके मार्गदर्शन में किसानों को इस आपदा से बाहर निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। प्रधानमंत्री जी की चिंता आप समझ सकते हैं, सरकार के कई मंत्री आएं और आज मैं आया हूँ। आज हमने रेत के टीले देखे, जहां फसलें लहलहा रही थीं। शिवराज सिंह ने कहा कि यह समय किसानों का दुःख बांटने और समाधान देने का है, राजनीति करने का नहीं।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्य के साथ मिलकर सभी प्रभावित परिवारों और किसानों को राहत देने का काम करेगी। मंत्री ने कहा कि जहां खेतों में रेत दब गई है, वहां राज्य सरकार को निर्णय लेकर किसानों को अपने खेत की रेत बेचने की अनुमति देनी चाहिए, ताकि वह उससे बाहर निकल सकें।
शिवराज सिंह ने कहा कि केवल बडयाल ब्राह्मण के लिए नहीं, पूरे जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए आया हूं, जिनकी फसलें बर्बाद हुई हैं, किसान की फसलें 4-5 फीट रेत में दबकर बर्बाद हो गई। फसल बर्बाद होती है तो किसान का भविष्य बर्बाद होता है, जिंदगी बर्बाद होती है। एक बार फसल बर्बाद होने से किसान कई साल तक उबर नहीं पाता। मैं रेत खोद के देखता रहा, मुझे धरती दिखाई नहीं दी। जब तक ये रेत नहीं जाएगी, तब तक दूसरी फसल नहीं आएगी।
शिवराज सिंह ने कहा कि पशु भी बह गए है। नुकसान बड़ा है, आपदा गहरी है, लोगों का दर्द गहरा है। आपका दर्द हमारा दर्द है, मैं यही कहूंगा कि आंसू मत बहाओ, हम मिलकर इस समस्या से निकलेंगे। गृह मंत्रालय हो, जल शक्ति विभाग हो, ग्रामीण विकास या कृषि सभी संबंधित विभागों की टीम आई है। इन्होंने सर्वे किया है। वो अपनी रिपोर्ट देगी। नुकसान का आकलन चल रहा है। राज्य सरकार का ज्ञापन आएगा, इसके बाद हम राहत देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि कुछ काम ऐसे हैं, जो राज्य सरकार को करना है। पहला काम है, गरीबों को संकट से बाहर करना। रेत के मामले में राज्य के स्तर पर फैसला कर लेना चाहिए कि जिसका खेत, उसकी रेत। रेत बची है, तो वो ही दे दो, यहां माइनिंग के नियम लागू न हों। किसान अपने-अपने खेतों की रेत बेचे, ये व्यवस्था करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ के अंतर्गत जो प्रावधान हैं, उन्हें हम लागू करेंगे। राज्य सरकार को केंद्र सरकार राशि देती है, जिसमें 75% हिस्सा केंद्र और 25% राज्य सरकार का होता है। आपदा प्रबंधन के लिए राज्य सरकार के पास लगभग 2499 करोड़ रुपये हैं, उसका उपयोग सरकार करेगी। इसके अलावा जो जरूरत होगी, केंद्र सरकार उसके लिए सहायता करेगी।
शिवराज सिंह ने बताया कि एनडीआरएफ के तहत भगवान न करे, लेकिन कोई जान यदि चली जाए, तो 4 लाख रुपये की सहायता दी जाती है, विकलांग होने पर 74 हजार रुपये की राशि दी जाती है। गाद निकालना हो, 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है। पहाड़ खिसकने से नुकसान होने पर सीमांत किसानों को 47 हजार रुपये देने का प्रावधान है।
शिवराज सिंह ने कहा कि मिर्च और धान जैसी फसल का नुकसान हुआ है। बीमित किसानों के नुकसान की पूरी भरपाई करने की कोशिश करेंगे। राहत की राशि के अलावा हम फसल बीमा योजना की राशि देंगे। उन्होंने कहा कि सब्जी और बागबानी फसल के लिए सिंचित क्षेत्र में 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है, कृषि वानिकी के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है। ये राशि राज्य सरकार के द्वारा बँटना है। दुधारू पशु के नुकसान पर 37,500 रुपये, घोड़ा और बैल के नुकसान पर 32 हजार रुपये, बछड़ा, टट्टू और खच्चर के नुकसान के लिए 20 हजार रुपये का प्रावधान है।
केंद्र सरकार बाढ़ से प्रभावित जम्मू-कश्मीर के किसानों तथा नागरिकों को हर संभव मदद और सहयोग देगी।
– माननीय केन्द्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी pic.twitter.com/Ic8035lvfE
— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) September 19, 2025
शिवराज सिंह ने कहा कि नहर क्षतिग्रस्त हैं, बांध के लिए भी राज्य सरकार केंद्र सरकार से बात करे। कई जगह मकान टूट गए हैं, जिनके लिए शिवराज सिंह ने घोषणा की कि 1,30,000 रुपये प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान के लिए दिए जाएंगे। टॉइलेट के अलग और मनरेगा की मजदूरी के लिए 40 हजार रुपये मेरा विभाग देगा। 5,101 मकान की जानकारी आई है, मैं यहां से जाते ही इनकी स्वीकृति दे दूंगा।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सेल्फ हेल्प ग्रुप का काम यहां बहुत अच्छा है। बहनों को नुकसान हुआ होगा। हम उसके लिए 74 करोड़ रुपये की राशि जारी करेंगे। शिवराज सिंह ने कहा कि सड़कों के लिए भी राज्य सरकार ज्ञापन देगी, उसकी व्यवस्था हम करेंगे। उन्होंने कहा कि मनरेगा की मजदूरी 100 दिन की होती है, हम राज्य सरकार से अनुरोध करेंगे, 150 दिन की मजदूरी दी जाए।
शिवराज सिंह ने कहा कि सीमा पर रहने वाले कई किसान जो खेती तो कर रहे हैं, लेकिन उनका स्वामित्व नहीं है। राज्य सरकार प्रमाणित कर के दे दे, इतना करने से मैं उन किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का पात्र बना दूंगा। पीएम किसान सम्मान निधि की एक किश्त हम तुरंत जम्मू-कश्मीर के किसानों के खातों में डालेंगे।
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