Last Updated: September 23, 2026

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योगी सरकार का बड़ा फैसला, जाति आधारित रैलियों पर लगाया गया प्रतिबंध

September 22, 2025

योगी सरकार का बड़ा फैसला, जाति आधारित रैलियों पर लगाया गया प्रतिबंध

यूपी डेस्क। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अब जाति के नाम पर होने वाली रैलियों और सभाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का कहना है कि ऐसे आयोजनों से सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता को खतरा हो सकता है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने जारी किया है। उन्होंने यह आदेश राज्य और जिलों के सभी जिलाधिकारियों, सचिवों और पुलिस प्रमुखों को रविवार देर रात भेजा। आदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 16 सितंबर के फैसले का हवाला दिया गया है।

 

आदेश में क्या कहा गया है?

राजनीतिक उद्देश्यों के लिए आयोजित जाति आधारित रैलियां जातिगत संघर्ष को बढ़ावा देती हैं। ऐसे आयोजन सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ हैं।पूरे राज्य में जाति आधारित रैलियों पर सख्त प्रतिबंध रहेगा।

 

SC-ST एक्ट में राहत

दीपक कुमार ने अपने 10 सूत्रीय आदेश में लिखा है कि FIR, गिरफ्तारी मेमो आदि में जाति का नाम नहीं लिखा जाएगा। इसके बजाय आरोपी या व्यक्ति के माता-पिता का नाम लिखा जाएगा। थानों के नोटिस बोर्ड, पुलिस वाहनों और साइनबोर्ड्स से जाति-सूचक संकेत और नारे हटाए जाएंगे। सोशल मीडिया पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी। हालांकि, SC-ST एक्ट से जुड़े मामलों में यह नियम लागू नहीं होगा। आदेश के पालन के लिए SOP और पुलिस नियमावली में बदलाव किया जाएगा।

 

जाति आधारित राजनीति पर असर

इस आदेश को जाति आधारित राजनीति करने वाली पार्टियों के लिए झटका माना जा रहा है। यह निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल जैसी पार्टियों को प्रभावित कर सकता है। चुनाव से पहले जाति आधारित सभाएं आयोजित कर लोगों को जोड़ने की परंपरा होती है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जाति आधारित प्रचार अभियान पहले ही शुरू हो गया है। इस मामले पर अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाए हैं।

 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

हाई कोर्ट ने कहा कि सभी वाहनों पर जाति आधारित नारों और चिह्नों पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 का हवाला देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर जाति आधारित घृणा फैलाने वाली सामग्री को निषेधित और चिन्हित किया जाए। पुलिस स्टेशनों के नोटिस बोर्ड में आरोपी के नाम के सामने जाति का कॉलम हटाने के लिए आदेश देने को कहा गया। इस तरह, उत्तर प्रदेश सरकार ने जाति आधारित राजनीति और सार्वजनिक विवादों को रोकने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।

 

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