Last Updated: September 25, 2026

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Tu Meri Puri kahani Movie Review मोहब्बत, शोहरत और जज़्बात का दिल छू लेने वाला सफ़र

September 26, 2025

Tu Meri Puri kahani Movie Review मोहब्बत, शोहरत और जज़्बात का दिल छू लेने वाला सफ़र

एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): काफी इंतज़ार के बाद, महेश भट्ट और अनु मलिक की जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटी है। इस बार फ़िल्म तू मेरी पूरी कहानी के साथ। दिलचस्प बात यह है कि यह फ़िल्म न सिर्फ़ अनुभवी हस्तियों के अनुभव का नतीजा है, बल्कि नई पीढ़ी के कलाकारों और निर्देशक को लेकर बनी है। सुहृता दास का निर्देशन, हिरण्या ओझा और अर्हन पटेल की पहली झलक, और विक्रम भट्ट का परामर्श मिलकर यह फ़िल्म साबित करती है कि अच्छी कहानी और ईमानदार प्रस्तुति के लिए नामी सितारे ज़रूरी नहीं होते।

कहानी और प्रस्तुति

फ़िल्म की नायिका अनिका (हिरण्या ओझा) एक बाग़ी और निडर लड़की है, जिसे फ़िल्मों की दुनिया में चमकना है। इसी सफ़र में उसकी मुलाक़ात होती है रोहन (अर्हन पटेल) से एक सबवे सिंगर जिसकी आवाज़ में जादू है और जिसके होंठों से निकला टाइटल ट्रैक “तू मेरी पूरी कहानी” सीधे दिल में उतर जाता है।

कहानी में पारिवारिक टकराव है पिता (तिग्मांशु धूलिया) का ठंडा व्यवहार, मां (जूही बब्बर) का साया, और अनिका का अपने सपनों की ओर बढ़ता जुनून। साथ ही है मोहब्बत, जुदाई और महत्वाकांक्षा की खींचतान। सुहृता दास का निर्देशन यहाँ साफ़ दिखाई देता है हर सीन सलीके से बुना हुआ, हर जज़्बात अपने पूरे असर के साथ।

अभिनय

हिरण्या ओझा (अनिका) – ग़ज़ब की पहली झलक। कभी बाग़ी, कभी टूटी-सी, और फिर सफलता की चोटी तक पहुँचती अनिका को उन्होंने सजीव कर दिया।

अर्हन पटेल (रोहन) – मासूमियत और संवेदनशीलता से भरा अभिनय। पिता की याददाश्त खोने वाली बीमारी वाले दृश्य बेहद असरदार।

शम्मी दुहान (राज) – जुनूनी खलनायक। उनका किरदार डर के शाहरुख़ की याद दिलाता है और साथ ही दर्शक के मन में जगह भी बना लेता है।

तिग्मांशु धूलिया – ग़ुस्सैल पिता, जो अपने प्यार को छुपाए रखते हैं। कम संवाद, लेकिन असरदार।

जूही बब्बर – ममता और स्थिरता का प्रतीक।

निर्देशन

सुहृता दास ने अपने पहले ही प्रयास में साबित किया कि वह रिश्तों की कच्ची गिरहों को भी संवेदनशीलता और सिनेमाई शिद्दत से परदे पर उतार सकती हैं। उनके निर्देशन में वही आत्मा है जो महेश भट्ट की फिल्मों में कभी नज़र आती थी। जैसे मोहित सूरी ने सायरा के ज़रिए अपनी पहचान बनाई थी, वैसा ही वादा सुहृता करती दिखती हैं।

संगीत

अनु मलिक का संगीत इस फ़िल्म की धड़कन है।

“तू मेरी पूरी कहानी” – आत्मा को छू लेने वाला गीत।

“ये इश्क़ है” – ताज़गी और खुरदरेपन से भरा, जो कहानी को और गहराई देता है।

कई सालों बाद अनु मलिक ने फिर से यह दिखाया कि उनकी धुनें सिर्फ़ कानों के लिए नहीं, दिल के लिए भी होती हैं।

महेश भट्ट का असर

फ़िल्म में बार-बार वह पुराना भट्ट अंदाज़ झलकता है टूटे हुए रिश्ते, महत्वाकांक्षा और मोहब्बत का संघर्ष। सायरा की यादें ताज़ा होती हैं, जहाँ संगीत और कहानी एक-दूसरे में घुलमिलकर कुछ नया रचते थे।

मुख्य सवाल : प्यार या शोहरत?

फ़िल्म का सबसे अहम सवाल है इंसान प्यार चुने या शोहरत? अनिका की यात्रा इस सवाल को बड़े मार्मिक ढंग से सामने रखती है। क्लाइमैक्स में जब वह राज (शम्मी दुहान) के सामने खड़ी होती है, तो यह सिर्फ़ जीत नहीं, आत्म-सम्मान और साहस का इज़हार है।

बॉक्स ऑफिस और बाज़ार

फ़िल्म की सबसे बड़ी चुनौती इसका रिलीज़ टाइम है। बिना बड़े सितारों और भारीभरकम प्रमोशन के, यह भीड़ खींच पाएगी या नहीं, कहना मुश्किल है। लेकिन जैसे आशिकी 2 या सायरा ने अपने संगीत और भावनात्मक पकड़ के सहारे दर्शकों का दिल जीता था, तू मेरी पूरी कहानी में भी वही संभावना है।

अंतिम निर्णय

तू मेरी पूरी कहानी एक फ़िल्म नहीं, एक अनुभव है। नए कलाकारों की ताज़गी, सुहृता दास का संवेदनशील निर्देशन, महेश और विक्रम भट्ट का अनुभव, और अनु मलिक का संगीत सब मिलकर इसे एक यादगार सफ़र बना देते हैं।

⭐ रेटिंग : 3.5/5
यह फ़िल्म उन सबके लिए है जो सिनेमा से सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि दिल को छू लेने वाले जज़्बात चाहते हैं।

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