नयी दिल्ली: भारत और चार सदस्यीय यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ बुधवार से प्रभावी होने जा रहा व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (टेपा) न केवल यूरोप के चार विकसित देशों के साथ वस्तुओं और सेवाओं के कारोबार को शुल्क और अन्य बाधाओं से मुक्त करने का समझौता है बल्कि इसके तहत इन देशों से भारत में 15 वर्ष में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भी जुड़ी है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड की सदस्यता वाले ईएफटीए के साथ यह एक ऐतिहासिक समझौता है वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाज़ार पहुंच को बढ़ाने वाला, बौद्धिक संपदा अधिकारों को मज़बूत करने और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत पहलों का समर्थन करते हुए सतत, समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाला समझौता है।
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