Last Updated: September 25, 2026

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‘संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है भारत’, विदेश मंत्री जयशंकर ने फिर दोहराया 

October 16, 2025

‘संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है भारत’, विदेश मंत्री जयशंकर ने फिर दोहराया 

नेशनल डेस्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि भारत संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में एक सशक्त और ज़िम्मेदार भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने यह बात संयुक्त राष्ट्र सैनिक योगदानकर्ता देशों (UNTCC) के प्रमुखों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

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भारत की प्रतिबद्धता पर जोर

जयशंकर ने कहा कि भारत, एक सुधारित संयुक्त राष्ट्र और नवीन बहुपक्षीय व्यवस्था में और अधिक ज़िम्मेदारियां उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि “सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत अब पहले से कहीं अधिक है। स्थायी और अस्थायी दोनों सदस्यताओं का विस्तार किया जाना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से, यह सुधार प्रक्रिया ही अब अटकाई जा रही है, जिससे ऐतिहासिक अन्याय जारी है।”

 

शांति अभियानों में भारत की भूमिका

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारत की दीर्घकालिक भूमिकाको रेखांकित करते हुए कहा, ”भारत ने अब तक 3 लाख से ज़्यादा सैनिक यूएन मिशनों में भेजे हैं, यह संख्या किसी भी देश से सबसे अधिक है। 182 भारतीय सैनिकों ने इन अभियानों में अपने प्राणों का बलिदान दिया है।” उन्होंने कहा कि ये सैनिक “बहुपक्षीयता के सच्चे प्रतिनिधि” हैं और उनकी बहादुरी, मानवता की सेवा के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा, “हमारे शांति सैनिकों ने दक्षिण सूडान, लेबनान, सीरिया और डीआर कांगो जैसे मुश्किल इलाकों में सेवा की है। ये हमारे उस विश्वास का प्रमाण हैं कि कहीं भी शांति, हर जगह शांति को मजबूत करती है।”

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मुख्य बिंदु

शांति अभियानों में अधिदेश यथार्थवादी और स्पष्ट हों, ताकि मिशन सफल हो सकें। मेजबान देश पर नागरिकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। शांति सैनिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और उन पर हमला करने वालों को सज़ा मिलनी ही चाहिए। प्रौद्योगिकी, शांति अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने में “शक्ति गुणक” के रूप में कार्य कर सकती है। भारत, शांति मिशनों में टेक्नोलॉजी लाने और ICT (सूचना और संचार तकनीक) के ज़रिए गलत जानकारियों से लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “रणनीतिक संचार आज की ज़रूरत है। हमें झूठी और भ्रामक सूचनाओं से निपटने की क्षमता विकसित करनी होगी।”

भारत की वैश्विक अपील

जयशंकर ने अपने भाषण के अंत में दोहराया कि भारत केवल सैनिक योगदानकर्ता नहीं है, बल्कि वह चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र में उसकी भूमिका नीतिगत और निर्णयकारी स्तर पर भी हो। विदेश मंत्री ने कहा, “भारत की भागीदारी, सिर्फ एक ज़िम्मेदार सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में है, जो वैश्विक शांति और स्थायित्व के लिए हर ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार है।”

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