इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की पहली एशियाई यात्रा के दौरान मलेशिया के साथ एक अहम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। बता दें कि यह डील केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन की बढ़ती आर्थिक प्रभावशीलता के सामने अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का एक कदम भी है। ट्रंप की अगली योजना जापान और दक्षिण कोरिया में इसी तरह की द्विपक्षीय डील्स को अंजाम देना है, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी दबदबा बनाए रखने की कोशिश होगी।
मलेशिया डील क्यों है अहम?
कुआलालंपुर में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ हस्ताक्षरित इस समझौते के दो मुख्य पहलू हैं: व्यापार विस्तार और दुर्लभ खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) में सहयोग। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अनुसार, मलेशिया अब अपने शुल्क और गैर-शुल्क अवरोधों में बदलाव करेगा, जिससे कृषि, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार में तेजी आएगी।
2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार 87 अरब डॉलर था, जिसमें अमेरिका का 25 अरब डॉलर का घाटा था। इस डील के तहत कई उत्पादों पर शुल्क कम किए जाएंगे, और मलेशिया ने उन्नत सेमीकंडक्टरों की चीन तस्करी रोकने का आश्वासन दिया है।
.@POTUS signs a historic trade deal with Malaysian Prime Minister @anwaribrahim 🇺🇸🇲🇾 pic.twitter.com/hAH4A5SZtf
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) October 26, 2025
दुर्लभ खनिज और अमेरिका की रणनीति
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर यह डील अमेरिका के लिए विशेष महत्व रखती है। चीन वर्तमान में वैश्विक रेर अर्थ्स का लगभग 80% नियंत्रित करता है और हाल ही में उसने निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और रक्षा तकनीक प्रभावित हो रही है। मलेशिया के साथ यह समझौता अमेरिका को इन खनिजों में लचीली और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
पूर्व में लगाए गए टैरिफ का समाधान
इस डील के जरिए अगस्त में ट्रंप द्वारा मलेशिया पर लगाए गए 19% शुल्क के मुद्दे को हल किया गया है। ट्रंप ने पहले 25% टैरिफ की चेतावनी भी दी थी। मलेशिया, जो अमेरिका को चिप्स का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है, अब शून्य प्रतिशत शुल्क पर अपने निर्यात को सुनिश्चित कर सकेगा।
ट्रंप की एशिया यात्रा का मकसद
ट्रंप ने अपने पांच दिवसीय दौरे की शुरुआत थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद के समाधान से की। इस दौरे में मलेशिया के अलावा जापान और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं। अमेरिका इस दौरे के माध्यम से न केवल व्यापारिक साझेदारी बढ़ाना चाहता है, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव को भी सीमित करना चाहता है।
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अमेरिका की रणनीति: शुल्क और डील का खेल
ट्रंप का “अमेरिका फर्स्ट” मॉडल अब एशियाई मंच पर ट्रेड डील्स और टैरिफ को हथियार बनाकर लागू हो रहा है। जापान पर 10-15% ऑटो शुल्क और दक्षिण कोरिया पर सेमीकंडक्टर टैरिफ की चेतावनी इसी रणनीति का हिस्सा हैं। लक्ष्य है द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से अमेरिका का आर्थिक दबदबा बढ़ाना और चीन पर नियंत्रण बनाए रखना।
वैश्विक प्रभाव
ट्रंप की यह रणनीति अमेरिकी विनिर्माण और रोजगार को बढ़ावा देगी, लेकिन वैश्विक महंगाई बढ़ने की संभावना भी है। मलेशिया जैसे देश लाभान्वित होंगे, वहीं छोटे निर्यातक प्रभावित हो सकते हैं। यदि जापान और दक्षिण कोरिया में भी डील सफल होती है, तो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका का दबदबा मजबूत होगा और चीन अलग पड़ सकता है।