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न्यूयॉर्क में मेयर बने जोहरान ममदानी, भारत से है खास नाता

November 5, 2025

न्यूयॉर्क में मेयर बने जोहरान ममदानी, भारत से है खास नाता

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका के मशहूर शहर न्यूयॉर्क में हुए मेयर चुनाव का नतीजा सामने आ गया है। इस बार भारतीय मूल के उम्मीदवार जोहरान ममदानी ने शानदार जीत दर्ज की है। ममदानी अब न्यूयॉर्क शहर के सबसे युवा, पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बन गए हैं।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जोहरान की यह जीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि ट्रंप ने उनके प्रतिद्वंदी उम्मीदवार का खुलकर समर्थन किया था।

किससे हुआ मुकाबला?

34 वर्षीय जोहरान ममदानी ने इस चुनाव में दो मजबूत उम्मीदवारों को पछाड़ा। एंड्रयू कुओमो, जो न्यूयॉर्क के पूर्व गवर्नर हैं और इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे। कर्टिस स्लिवा, रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार थे। जोहरान को शुरू से ही जनता का जबरदस्त समर्थन मिला। वहीं इस चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क जैसे नामी हस्तियों ने एंड्रयू कुओमो का समर्थन किया था, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं गया।

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कौन हैं जोहरान ममदानी?

जोहरान ममदानी की उम्र 34 साल है। उनका जन्म अफ्रीकी देश युगांडा में हुआ, लेकिन उनका बचपन और पढ़ाई न्यूयॉर्क शहर में ही हुई। वह डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े हैं और न्यूयॉर्क राज्य असेंबली के सदस्य भी रह चुके हैं। अपनी ईमानदार छवि और सामाजिक मुद्दों पर काम करने के लिए उन्हें युवाओं का खूब समर्थन मिला।

भारत से गहरा नाता

जोहरान ममदानी का भारत से खास जुड़ाव है। उनकी मां मीरा नायर ओडिशा के राउरकेला की रहने वाली हैं और वह एक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हैं। मीरा नायर ने कई अंतरराष्ट्रीय हिट फिल्में सलाम बॉम्बे (1988), मिसिसिपी मसाला (1991) और मॉनसून वेडिंग (2001) बनाई हैं। जोहरान के पिता महमूद ममदानी युगांडा के जाने-माने स्कॉलर और लेखक हैं। वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी में मानव विज्ञान (Anthropology) के प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1946 में मुंबई में हुआ था और वे युगांडा की राजधानी कंपाला में भारतीय प्रवासी परिवार में पले-बढ़े।

ऐतिहासिक जीत का महत्व

जोहरान ममदानी की यह जीत न सिर्फ भारतीय समुदाय के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि अमेरिका की राजनीति में विविधता और स्वीकार्यता का प्रतीक भी मानी जा रही है। उनकी सफलता से यह साबित हुआ है कि मेहनत और ईमानदारी से कोई भी व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने में अपनी पहचान बना सकता है।

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