इंटरनेशनल डेस्क: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में इन दिनों छात्रों ने सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। नेपाल की तरह अब पाकिस्तान में भी युवा सत्ता के रवैये से नाराज़ हैं और सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध शिक्षा सुधारों, ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी और नई ई-मार्किंग प्रणाली के खिलाफ है।
कैसे शुरू हुआ आंदोलन
शुरुआत में यह प्रदर्शन ई-मार्किंग सिस्टम और बढ़ती फीस के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध के रूप में शुरू हुआ था। लेकिन जल्द ही यह आंदोलन शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन बन गया। छात्रों का आरोप है कि ई-मार्किंग के कारण रिजल्ट में कई गलतियां हुईं, कुछ छात्रों को उन विषयों में पास दिखाया गया, जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं।
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छात्रों की मुख्य मांगें
छात्रों ने सरकार से मांग की है कि प्रति विषय 1500 रुपये को पूरी तरह माफ किया जाए। सात विषयों के लिए यह रकम 10,500 रुपये तक पहुंच जाती है, जो गरीब छात्रों के लिए चुकाना मुश्किल है। इस आंदोलन को अब संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का भी समर्थन मिल गया है। यही संगठन पिछले महीने हुए हिंसक प्रदर्शनों का नेतृत्व कर चुका है।
पिछले आंदोलन की पृष्ठभूमि
सिर्फ एक महीने पहले PoK में जनता ने 30 मांगों के साथ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। उस आंदोलन में लोग टैक्स छूट, सस्ती बिजली और आटे पर सब्सिडी तथा भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग कर रहे थे। पुलिस कार्रवाई में 12 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। भारी दबाव के बाद सरकार को कई मांगें माननी पड़ी थीं।
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नेपाल जैसी क्रांति के संकेत
हालांकि मौजूदा आंदोलन शिक्षा से जुड़ा है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह राजनीतिक अस्थिरता की ओर भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे नेपाल में युवाओं ने सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था और अंततः वहां की सरकार को झुकना पड़ा था, वैसे ही PoK में भी ‘Gen Z क्रांति’ की लहर उठ रही है। अब सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान सरकार इस बार भी आंदोलन को दबा पाएगी या फिर यह युवा बगावत एक नई राजनीतिक दिशा तय करेगी।
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