नेशनल डेस्क। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आ रहे हैं और उनके साथ रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव सहित करीब 7 कैबिनेट मंत्री भी शामिल होंगे। यह दौरा भारत-रूस संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आइये इसे विस्तार से जानते हैं…
पुतिन के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल हैं
इस दौरे में पुतिन के साथ कई बड़े अधिकारी और मंत्री भारत आएंगे।
-रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव
-कृषि मंत्री
-वित्त मंत्री
-आर्थिक विकास मंत्री
-रूस के हथियार निर्यात विभाग रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के अधिकारी
-रशियन सेंट्रल बैंक की गवर्नर
-पुतिन के मीडिया सलाहकार दिमित्री पेसकोव
-भारत और रूस के बीच इस यात्रा में लगभग 10 इंटरगवर्नमेंटल समझौते, 15 कमर्शियल समझौते होन की उम्मीद है।
मोदी–पुतिन की दो अहम बैठकें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच दो महत्वपूर्ण मुलाकातें होंगी
इसमें केवल मोदी, पुतिन और कुछ चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे।
इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे और आपसी सहयोग पर चर्चा होगी। दोनों नेता इंडिया-रशिया बिज़नेस फोरम में भी शामिल होंगे, जहां व्यापार और निवेश पर बातचीत होगी।
RT-India चैनल की लॉन्चिंग
पुतिन भारत दौरे के दौरान रूस के सरकारी न्यूज़ चैनल RT (रशिया टुडे) के भारतीय संस्करण RT-India की लॉन्चिंग में भी उपस्थित रहेंगे।
इंडिया-रशिया डिफेंस मीटिंग
मंगलवार (9 दिसंबर 2025) को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव इंडिया-रशिया इंटर गवर्नमेंटल कमीशन ऑन मिलिट्री एंड टेक्निकल कोऑपरेशन की मीटिंग में हिस्सा लेंगे। मीटिंग से पहले बेलौसोव को दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में तीनों सेनाओं की संयुक्त टुकड़ी की तरफ से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।
कौन हैं रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव
आंद्रे बेलौसोव पेशे से अर्थशास्त्री हैं। 2024 में पुतिन के पांचवीं बार राष्ट्रपति बनने पर उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया। इससे पहले वह पुतिन के मुख्य आर्थिक सलाहकार और रूस के उप-प्रधानमंत्री (2020-24) रह चुके हैं। पुतिन ने सर्गेई शोइगु को हटाकर बेलौसोव को रक्षा मंत्रालय इसलिए दिया क्योंकि रूस का रक्षा बजट यूक्रेन युद्ध के बाद तेजी से बढ़ रहा था बेलौसोव को आर्थिक प्रबंधन में विशेषज्ञ माना जाता है।
रूस की अर्थव्यवस्था में बेलौसोव की भूमिका
यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रही है। इसका बड़ा श्रेय बेलौसोव के आर्थिक फैसलों को दिया जाता है। यही कारण है कि पुतिन ने भारत जैसे महत्वपूर्ण दौरे में उन्हें साथ रखा है।
भारत को S-400 और अन्य हथियारों की जरूरत
भारत को रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की 300 अतिरिक्त मिसाइलों की जरूरत है। पहले से लिए गए S-400 सिस्टम की डिलीवरी में देरी भी भारत की चिंता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह चिंता सीधे बेलौसोव के सामने रखी थी। भारत जिन हथियारों को विदेशों से खरीदता है, उनमें
रूस की हिस्सेदारी लगभग 38% है।
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