
पंचकूला। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन की दो दिवसीय हड़ताल ने सोमवार को सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को अचानक धीमा कर दिया।
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अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण ओपीडी में मरीज सुबह से ही असहज स्थिति में खड़े दिखे। कई वार्ड उपचार के बिना पड़े रहे, जिससे गंभीर मामलों में चिंता स्पष्ट नजर आई।
प्रशासन ने स्थिति सामान्य करने के लिए मुलाना मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को बुलाया, लेकिन उनकी सेवाएं औपचारिक परामर्श तक सीमित रहीं। वे केवल दवा देकर विस्तृत जांच हड़ताल के बाद कराने की सलाह देते दिखे, जिससे भीड़ और निराश हुई।
खासकर वे मरीज परेशान हुए, जो खाली पेट जांच कराने आए थे और अब उन्हें अगले दिन लौटने की मजबूरी दी गई। बढ़ती भीड़ ने अस्पताल प्रबंधन की असमर्थताओं को और उजागर किया।
सीएमओ डॉ. मुक्ता कुमार ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सकों, एनएचएम टीम और कंसलटेंट स्टाफ की मदद से सेवाएं संभाली जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जिला बड़े पैमाने पर सिविल अस्पताल पर निर्भर है, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था लगातार सक्रिय रखी जा रही है।