कुरुक्षेत्र। प्रदेश में कथित धान घोटाले की जांच अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने 39 मंडी सचिवों सहित कई अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू की है, लेकिन भारतीय किसान यूनियन इसे बेहद अधूरा कदम कह रही है।
इसी कारण भाकियू ने मुख्यमंत्री को विस्तृत पत्र भेजकर मामले की सीबीआई जांच की मांग रखी है। संगठन का दावा है कि घोटाले की वास्तविक राशि पांच हजार करोड़ रुपये से काफी अधिक हो सकती है।
पत्र में भाकियू ने भूमि सत्यापन प्रक्रिया पर कई गंभीर प्रश्न उठाए हैं। यूनियन के अनुसार पंजीकृत और सत्यापित रकबे के आंकड़ों में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है।
इसके अलावा कई जिलों में नदी, नाले और अवैध कॉलोनियों वाले क्षेत्रों को भी धान रकबा दर्शाया गया। संगठन ने इसे प्रशासनिक स्तर पर की गई सुनियोजित जालसाजी बताया है।
भाकियू ने बाढ़ प्रभावित जिलों में नुकसान दर्ज होने के बावजूद अतिरिक्त पैदावार दिखाए जाने पर भी संदेह जताया है। छह जिलों में रकबा दिखने के बावजूद खरीद एक दाना भी नहीं हुई।
यूनियन का आरोप है कि विवादित भूमि पर पराली प्रबंधन का भारी खर्च दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। साथ ही बिना वास्तविक तुलाई के गेट पास जारी करके फर्जी लेनदेन को बढ़ावा मिला।
भाकियू ने पुराने चावल को अन्य राज्यों से मंगवाकर वैध स्टॉक में मिलाने का भी आरोप लगाया है। इसके अतिरिक्त पीडीएस चावल को सस्ते में बेचकर करोड़ों का नुकसान पहुंचाने की बात भी कही गई है।
संगठन ने दावा किया कि किसानों पर नमी सहित कई अवैध कट लगाए गए। इससे लगभग 800 करोड़ रुपये तक का नुकसान सीधे किसानों पर पड़ा।
यूनियन ने यह भी कहा कि कई जिलों में असामान्य पैदावार दिखाए जाने के बावजूद कार्रवाई सीमित रही। जबकि पकड़ी गई बाहरी गाड़ियों के बावजूद कई मामलों को दबाए जाने का आरोप भी सामने आया है।