नई दिल्ली: लोकसभा में चुनाव सुधारों पर जारी बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर कई ऐतिहासिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में वोट चोरी की शुरुआत कांग्रेस ने की थी और इसके तीन बड़े उदाहरण मौजूद हैं। शाह ने दावा किया कि जवाहरलाल नेहरू का प्रधानमंत्री बनना भी “पहली वोट चोरी” था।
पहला आरोप: नेहरू का प्रधानमंत्री बनना
अमित शाह के अनुसारआज़ादी के बाद यह तय करने के लिए कि देश का पहला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, कांग्रेस के 28 प्रदेश अध्यक्षों ने सरदार पटेल को वोट दिया था। केवल 2 लोगों ने जवाहरलाल नेहरू को वोट दिया। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नेहरू बने, जबकि वोट पटेल के पक्ष में थे। शाह ने कहा, “यह भारत की पहली वोट चोरी थी।”
दूसरा आरोप: इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द होना
अमित शाह ने कहा, इंदिरा गांधी रायबरेली सीट से चुनी गई थीं। समाजवादी नेता राजनारायण ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि इंदिरा गांधी का चुनाव सही तरीके से नहीं जीता गया था। शाह के अनुसार यह भी वोट चोरी का उदाहरण था।उन्होंने कहा कि इसके बाद इंदिरा गांधी ने खुद को बचाने के लिए संसद में ऐसा कानून पास कराया जिससे प्रधानमंत्री के खिलाफ केस नहीं किया जा सके।
तीसरा आरोप: जजों की सुपरसिडिंग और वोटर बनना
अमित शाह ने तीसरे उदाहरण में कहा, इंदिरा गांधी ने संवैधानिक संस्थाओं पर हस्तक्षेप करने के लिए वरिष्ठ जजों को बायपास कर एक जूनियर जज को चीफ जस्टिस बना दिया। शाह के मुताबिक यह भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के “चोरी” जैसा था क्योंकि योग्यता को नजरअंदाज कर फैसला किया गया।
उन्होंने एक और आरोप जोड़ा कि एक मामला दिल्ली की अदालत में है जिसमें कहा गया है कि सोनिया गांधी भारत की नागरिक बनने से पहले वोटर सूची में शामिल हो गई थीं। अमित शाह ने कहा कि यह बात तथ्यात्मक है और अदालत में इसका जवाब दिया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि आज विपक्ष चुनाव आयोग और इम्युनिटी पर सवाल उठा रहा है, जबकि अपने समय में कांग्रेस नेताओं ने खुद के लिए फैसलों को मोड़ा, कानून बदले और संस्थाओं को प्रभावित किया। उन्होंने कहा, “इतिहास रिकॉर्ड पर है। कांग्रेस ने तब खुद को इम्युनिटी दी, आज दूसरों पर आरोप लगा रही है।”
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