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बांग्लादेश में हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग पर बड़ा एक्शन, यूनुस सरकार ने 7 लोगों को किया गिरफ्तार

December 20, 2025

बांग्लादेश में हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग पर बड़ा एक्शन, यूनुस सरकार ने 7 लोगों को किया गिरफ्तार

नेशनल डेस्क: बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में एक हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या किए जाने के मामले में सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने दी है।

मारे गए युवक की पहचान 27 वर्षीय सनातन हिंदू दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है। आरोप है कि उसे भीड़ ने बीच चौराहे पर घेर लिया और बेरहमी से पीटकर उसकी हत्या कर दी। यह घटना पूरे देश में आक्रोश का कारण बनी हुई है। मोहम्मद यूनुस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने इस मामले में सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां मयमनसिंह के बलुका इलाके में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी के दौरान की गईं।

गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम

गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद लिमोन सरकार (19), मोहम्मद तारेक हुसैन (19), मोहम्मद मानिक मिया (20), इरशाद अली (39), निजुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38) और मोहम्मद मिराज हुसैन अकॉन (46) शामिल हैं।

क्यों भड़की हिंसा?

यह हिंसा उस समय भड़की जब छात्र आंदोलन से जुड़े नेता और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर सामने आई। हादी का सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। इससे पहले दिसंबर में ढाका में उन पर गोलीबारी हुई थी। उनकी मौत के बाद कई इलाकों में तनाव और अशांति फैल गई।

सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया

बांग्लादेश सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि नए बांग्लादेश में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने लोगों से संयम बरतने और अफवाहों से दूर रहने की अपील भी की है। सरकार ने यह भी बताया कि हिंसा के दौरान कुछ मीडिया संस्थानों के दफ्तरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई, हालांकि वहां काम कर रहे पत्रकार सुरक्षित हैं।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता

इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कानून को अपने हाथ में लेना लोकतंत्र के लिए खतरा है और किसी भी मामले की जांच सिर्फ कानून के दायरे में ही होनी चाहिए।

दीपू चंद्र दास का आखिरी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में और गुस्सा है। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भीड़ कैसे इकट्ठा हुई, पुलिस हालात संभालने में क्यों नाकाम रही और क्या यह घटना पहले से साजिश के तहत की गई थी या अचानक हुई हिंसा थी।

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