
पंजाब सरकार की हाई-टेक एम्बुलेंस दूर-दराज के गांवों में भी 15-20 मिनट के अंदर मरीज़ों तक पहुंचकर जान बचा रही हैं। जैसा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का कहना है कि लक्षय हर पंजाबी की जान बचाना है। बस एक फोन करने पर हाई-टेक एम्बुलेंस कुछ ही मिनटों में आपके दरवाज़े पर पहुँच जाती है। हाई-टेक एम्बुलेंस की वजह से इमरजेंसी हेल्थकेयर सेक्टर मजबूत हुआ है।
आम जनता के लिए 108 टोल-फ्री हेल्पलाइन 24/7 उपलब्ध है। बस एक कॉल करने पर कंट्रोल रूम, जीपीएस ट्रैकिंग, पैरामेडिक्स, एम्बुलेंस और अस्पताल एक साथ काम करते हैं। पंजाब में अब 371 एम्बुलेंस हैं, जिनमें से 46 नई हाई-टेक गाड़ियाँ शामिल हैं, जिन्हें हाल ही में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इनमें से सात को समाना (पटियाला) में ‘चाइल्ड मेमोरियल एम्बुलेंस’ के तौर पर समर्पित की गईं हैं, जो उन बच्चों की याद में जिन्होंने पिछले साल सड़क हादसे में अपनी जान गंवाई।
पंजाब के हेल्थकेयर सिस्टम की सबसे बड़ी समस्या लंबे समय से यह रही है कि कई गांव बड़े अस्पतालों से काफी दूर हैं। आपात स्थिति में मरीज को समय पर इलाज न मिल पाने के कारण कई बार जान चली जाती है। सड़क हादसे, दिल का दौरा या गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं में हर मिनट बेहद अहम होता है, लेकिन दूरी और देरी अक्सर जानलेवा साबित होती रही है।
इस चुनौती को दूर करने में अब हाई-टेक एम्बुलेंस अहम भूमिका निभा रही हैं। ये एम्बुलेंस सिर्फ मरीज को अस्पताल पहुंचाने का साधन नहीं हैं, बल्कि चलती-फिरती इंटेंसिव केयर यूनिट की तरह काम करती हैं। इनमें ऑक्सीजन सपोर्ट, कार्डियक मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर, वेंटिलेटर, जरूरी इमरजेंसी दवाएं और ट्रॉमा किट मौजूद हैं।
इससे मरीज का इलाज अस्पताल पहुंचने के बाद नहीं, बल्कि मौके पर ही शुरू हो जाता है। खासकर दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं है। प्रशिक्षित पैरामेडिक्स तेजी से गांवों तक पहुंचते हैं, मरीज की हालत को स्थिर करते हैं और अस्पताल ले जाते समय भी इलाज जारी रखते हैं।
शहरों में ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या रहा है। लुधियाना, अमृतसर और जालंधर जैसे बड़े शहरों में अक्सर ट्रैफिक के कारण एम्बुलेंस को समय पर पहुंचने में दिक्कत होती थी। इसे ध्यान में रखते हुए हाई-टेक एम्बुलेंस में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है, जो सीधे सेंट्रल कंट्रोल रूम से जुड़ा रहता है। इससे एम्बुलेंस को सबसे छोटा और तेज़ रास्ता मिल जाता है। इसका नतीजा यह है कि अब शहरों में 15 मिनट और गांवों में 20 मिनट के भीतर मरीज तक पहुंचने का लक्ष्य काफी हद तक पूरा किया जा रहा है, जो देश की तेज़ इमरजेंसी सेवाओं में गिना जा रहा है।
वर्ष 2024 में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चंडीगढ़ में 58 नई हाई-टेक एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर राज्य को समर्पित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा था कि इन एम्बुलेंस को इस तरह तैनात किया गया है कि शहरी इलाकों में 15 मिनट और ग्रामीण इलाकों में 20 मिनट के भीतर जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचा जा सके। उन्होंने बताया कि इन एम्बुलेंस पर करीब 14 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और इनमें जीवन रक्षक दवाएं और आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, ताकि प्राथमिक इलाज तुरंत शुरू हो सके और समय पर जान बचाई जा सके।
पंजाब सरकार का फोकस सिर्फ आधुनिक गाड़ियों पर नहीं, बल्कि उन्हें चलाने वाले लोगों पर भी है। हर हाई-टेक एम्बुलेंस में प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन और पैरामेडिक्स तैनात किए गए हैं। इन्हें ट्रॉमा केयर, दिल से जुड़ी बीमारियों, मातृ स्वास्थ्य और बच्चों की इमरजेंसी देखभाल की नियमित ट्रेनिंग दी जाती है। सड़क हादसों के मामलों में ये टीमें सड़क सुरक्षा बल के साथ मिलकर काम करती हैं, जिससे मौके पर तुरंत मेडिकल मदद मिलती है और मरीजों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जा सकता है।
इस संयुक्त प्रयास से कई मामलों में मौतों की संख्या में कमी आई है। 108 एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत साल 2011 में हुई थी। तब से अब तक यह सेवा पूरे पंजाब में 30 लाख से ज्यादा लोगों की मदद कर चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, 108 सेवा राज्य की इमरजेंसी हेल्थकेयर व्यवस्था की रीढ़ है। नई हाई-टेक एम्बुलेंस के जुड़ने से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मदद के लिए आने वाली कोई भी कॉल अनसुनी न रहे। इस सिस्टम की मजबूती का एक बड़ा उदाहरण हाल की बाढ़ के दौरान देखने को मिला। सितंबर 2025 में जब कई इलाके पानी में डूब गए और गांवों का संपर्क टूट गया, तब एम्बुलेंस सेवाओं ने अहम भूमिका निभाई।
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