
पंजाब सरकार नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ इस समस्या को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में भी देख रही है। पंजाब सरकार का मानना है कि नशे की लत केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज और सही देखभाल ज़रूरी है।
इसी सोच के तहत पंजाब सरकार अपने नशा विरोधी अभियान में नशा मुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रमों को लगातार मजबूत कर रही है। पंजाब सरकार नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने, इलाज की सुविधाओं को बेहतर करने और समाज स्तर पर सहायता तंत्र विकसित करने पर काम कर रही है, ताकि नशे की चपेट में आए लोग दोबारा सामान्य जीवन जी सकें।
अधिकारियों के मुताबिक, पंजाब सरकार का फोकस खास तौर पर इलाज और काउंसलिंग की सुविधा हर ज़रूरतमंद तक पहुँचाना, नशे के शिकार लोगों को मदद मांगने में झिझक न हो, इसके लिए सामाजिक कलंक को कम करना और सिर्फ़ कुछ दिनों के इलाज की बजाय लंबे समय तक चलने वाले पुनर्वास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
पंजाब सरकार का कहना है कि केवल नशे की सप्लाई रोक देने से समस्या खत्म नहीं होगी, जब तक नशे की लत से जूझ रहे लोगों का इलाज और पुनर्वास नहीं होगा, तब तक इस संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
नशे के खिलाफ दोहरी रणनीति
पंजाब सरकार एक दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। एक तरफ सीमा पर ड्रोन और तस्करी रोकने के लिए आधुनिक तकनीक जैसे ‘बाज अख’ एंटी-ड्रोन सिस्टम को तैनात किया गया है। वहीं दूसरी ओर नशा पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास पर भी बराबर ज़ोर दिया जा रहा है।
‘बाज अख’ सिस्टम के ज़रिए पंजाब सरकार ने नशा तस्करों को सख्त संदेश दिया है कि अब अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही पुनर्वास कार्यक्रमों पर ध्यान देकर यह भी स्वीकार किया गया है कि नशे की वजह से समाज और परिवारों को गहरी चोट पहुंची है, जिसे भरना बेहद ज़रूरी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है। नशे की सप्लाई को पूरी तरह रोकना और नशे से हुए नुकसान को ठीक करना। पंजाब सरकार का मानना है कि इन्हीं दोनों प्रयासों के ज़रिए पंजाब को धीरे-धीरे एक नशा-मुक्त राज्य की ओर ले जाया जा सकता है।
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