Last Updated: September 26, 2026

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बलूचिस्तान में बड़े हमलों के बाद पाकिस्तान ने किया पलटवार, 140 से ज्यादा लोगों को मार डाला

February 2, 2026

बलूचिस्तान में बड़े हमलों के बाद पाकिस्तान ने किया पलटवार, 140 से ज्यादा लोगों को मार डाला

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने करीब 40 घंटे तक चले एक सैन्य अभियान में 145 लोगों को मार गिराया। स्थानीय मीडिया ने प्रांतीय मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के हवाले से बताया कि यह कार्रवाई बलूचिस्तान में “तालमेल वाले” बंदूक और बम हमलों की एक सीरीज के जवाब में की गई। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के मुताबिक, इस अभियान में 92 उग्रवादियों को मार गिराया गया। वहीं, 15 आम नागरिकों की भी मौत हो गई। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने यह खबर प्रकाशित की।

मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने बताया कि इन हमलों में पुलिस और फ्रंटियर कोर समेत अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के 17 जवान मारे गए। इसके अलावा, नौसेना के एक अधिकारी की भी जान गई। कुल मिलाकर 31 लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में हाल के वर्षों में हिंसा की यह सबसे खतरनाक लहर मानी जा रही है। यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है और इसकी सीमाएं ईरान और अफगानिस्तान से लगती हैं। यहां सक्रिय विद्रोही गुटों ने सुरक्षा बलों, आम लोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमले तेज कर दिए हैं।

पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि हमलावर आम नागरिकों के वेश में अस्पतालों, स्कूलों, बैंकों और बाजारों में घुसे और फिर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि दुकानों में काम कर रहे सामान्य लोगों को निशाना बनाया गया और हमलों के दौरान नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया गया। चौधरी ने कहा, “हर मामले में, हमलावर नागरिकों के रूप में आए और दुकानों में काम करने वाले आम लोगों को अंधाधुंध निशाना बनाया।”

इन हमलों की जिम्मेदारी अलगाववादी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है। संगठन ने दावा किया कि उसने ‘हीरोफ’ या ‘काला तूफान’ नाम से एक संगठित अभियान चलाया, जिसमें पूरे बलूचिस्तान में सुरक्षाबलों को निशाना बनाया गया। संगठन का यह भी दावा है कि उसने सुरक्षा बलों के 80 से ज्यादा जवानों को मार डाला और 18 को बंदी बना लिया। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे गरीब प्रांत है। यहां दशकों से विद्रोह चल रहा है। बलूच समुदाय के अलगाववादी समूह लंबे समय से अधिक स्वायत्तता और प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों में बड़ा हिस्सा देने की मांग करते रहे हैं।

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