हिमाचल डेस्कः प्रदेश में रविवार को मौसम साफ रहने की संभावना है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते 9 फरवरी से मौसम में बदलाव आने का पूर्वानुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 9 फरवरी को किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा और कुल्लू के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी हो सकती है। वहीं 10 फरवरी को पूरे प्रदेश में वर्षा और हिमपात के आसार जताए गए हैं।
इन जिलों में तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड
शनिवार को प्रदेश भर में धूप खिली रही। ऊना में अधिकतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बावजूद प्रदेश के कई इलाकों में शीतलहर का प्रकोप जारी है। शुक्रवार रात को किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा, कुल्लू और सोलन जिलों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया गया। अन्य जिलों के कुछ क्षेत्रों में भी तापमान 5 डिग्री से कम बना हुआ है।
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बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान जारी
मौसम विभाग ने 9 से 11 फरवरी तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान जारी किया है। 10 फरवरी को पूरे प्रदेश में बादल छाए रहने और वर्षा की संभावना है। इस दौरान कई क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज के साथ बिजली चमकने को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। 12 फरवरी से प्रदेश में मौसम के फिर से साफ होने की संभावना है। आगामी 48 घंटों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि इसके बाद अगले 2–3 दिनों में तापमान में इतनी ही गिरावट आने के आसार हैं।
बर्फबारी से हिमालयी ग्लेशियरों को मिली राहत
23 जनवरी से अब तक हिमालयी क्षेत्र में करीब पांच बार व्यापक बर्फबारी हो चुकी है। कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के हिमालयी इलाकों में 11 दिनों के भीतर हुई बर्फबारी से लगातार सिकुड़ रहे ग्लेशियरों को बड़ी राहत मिली है। ग्लेशियरों पर लगभग 15 से 20 फीट तक बर्फ की मोटी परत जम गई है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के दबाव से जूझ रहे इन ग्लेशियरों के लिए यह हिमपात संजीवनी के समान माना जा रहा है। बर्फबारी के बाद पर्वतीय क्षेत्रों में दिन और रात के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया धीमी हो गई है।
कश्मीर क्षेत्र के सियाचिन, कोलाहोई, द्रंग-द्रुंग, माछोई और थाजिवास जैसे प्रमुख ग्लेशियरों पर ताजा बर्फ की परत जमने से सूरज की किरणें पुरानी बर्फ तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में अल्बीडो प्रभाव कहा जाता है, जिसके कारण गर्मी का असर कम हुआ है और ग्लेशियरों का पिघलाव धीमा पड़ा है। यही स्थिति हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और चंद्रभागा घाटी में भी देखने को मिल रही है।
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