Last Updated: October 7, 2026

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Himachal: जेपी नड्डा ने टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया वैक्सीन का किया शुभारंभ

February 21, 2026

Himachal: जेपी नड्डा ने टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया वैक्सीन का किया शुभारंभ

हिमाचल डेस्क। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल करते हुए हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान में स्वदेशी रूप से निर्मित टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शुभारंभ किया गया है। टीडी वैक्सीन के शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी मौजूद रहे। उन्होंने इस कार्यक्रम को सार्वजनिक स्वास्थ्य की संरचना में एक मील का पत्थर भी बताया। खास बात ये है कि केंद्रीय अनुसंधान संस्थान ने पहली बार स्वदेशी टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शुभारंभ किया है।

इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान की टीम की तारीफ की और कहा कि स्वदेशी टीडी वैक्सीन स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनका यह भी कहना है कि इस वैक्सीन के शुभारंभ से भारत ने 99 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज हासिल कर लिया है, जिसे विश्व की नजरों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी छलांग के रूप में देखा जा रहा है। यह हमारे देश की बड़ी उपलब्धियों में शामिल होगी।

बता दें कि टीडी वैक्सीन के औपचारिक शुभारंभ के साथ केंद्रीय अनुसंधान संस्थान अप्रैल 2026 तक सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को 55 लाख खुराक की आपूर्ति करेगा। इसके साथ ही टीडी वैक्सीन के उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हीं के स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पाने के लिए हर राज्य की सरकार अथक प्रयास कर रही है और लक्ष्यों को पूरा भी कर रही है। स्वदेशी रूप से निर्मित टीडी वैक्सीन का शुभारंभ स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को पहले ही ‘विश्व की औषधालय’ के रूप में जाना जाता है और हमारे देश उभरते टीका निर्माताओं में से एक है। इसी के साथ भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियामक प्रणालियों में नंबर-3 का स्तर प्राप्त किया है, जो भारत के लिए गर्व की बात है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने याद दिलाया कि ऐतिहासिक रूप से टीके और दवाओं के विकास में लंबा समय लगता था। टिटनेस के टीके को विकसित होने में विश्व स्तर पर दशकों लग गए, तपेदिक की दवाइयों को विकसित होने में लगभग 30 साल लगे और जापानी एन्सेफलाइटिस के टीके के लिए लगभग एक सदी वैज्ञानिक प्रयास करना पड़ा। इसके विपरीत, कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने नौ महीनों के भीतर दो स्वदेशी टीके विकसित किए और बूस्टर खुराक सहित 220 करोड़ से अधिक खुराकें दीं। उन्होंने यह भी बताया कि कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से वितरित किए गए, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के डिजिटल परिवर्तन को दर्शाता है।

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