Last Updated: September 28, 2026

Dainik Savera Times Logo

‘लुका छुपी’ के 7 साल पूरे: कैसे कार्तिक आर्यन बने आम भारतीय युवाओं की आवाज़?

March 2, 2026

‘लुका छुपी’ के 7 साल पूरे: कैसे कार्तिक आर्यन बने आम भारतीय युवाओं की आवाज़?

एंटरटेनमेंट डेस्क: अपने अब तक के करियर में कार्तिक आर्यन ने अक्सर यह दिखाया है कि वह हर किरदार को उसकी ज़रूरत के हिसाब से निभाते हैं, न कि किसी एक तय दायरे में बंधकर एक ही छवि को दोहराते हैं। फिर चाहे उनके किरदार में हास्य हो, भावुकता हो या संयम हो, हर बार कहानी के भाव को वे न सिर्फ ईमानदारी से पकड़ते हैं, बल्कि उसे निभाते भी हैं। हालांकि ‘लुका छुपी’ इसका साफ़ उदाहरण है, जहां उन्होंने चुने हुए किरदार के साथ पूरा न्याय किया।

‘लुका छुपी’ में कार्तिक आर्यन एक ऐसे छोटे शहर के युवक के रूप में नज़र आए, जो आधुनिक रिश्तों की सोच और पारिवारिक उम्मीदों के बीच फंसा हुआ नई पीढ़ी का युवा है। जिस तरह उन्होंने अपने किरदार से समाज के डर, लोगों की बातें और अपने फैसलों को लेकर झिझक को अपनी भावनाओं के साथ दिखाया, वे काफी अच्छी लगी। ये भावनाएं इतनी सच्ची थी कि युवा दर्शक उनसे इस कदर जुड़ गए कि उन्हें कार्तिक के रूप में अपनी कहानी नज़र आने लगी। खासकर मेट्रो शहरों से बाहर रहनेवाले युवा।

इस फिल्म ने टियर-2 और टियर-3 शहरों में कार्तिक के युवा दर्शक वर्ग को और मज़बूत किया और कार्तिक के बिना ज़रूरत से ज़्यादा ड्रामा किए, उनका सधा हुआ और नेचुरल अभिनय लोगों को सीधे जोड़ गया। उनकी यही सादगी, उनकी सबसे बड़ी ताक़त बनकर उभरी।

मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्माण दिनेश विजान और निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया था। कृति सैनन और पंकज त्रिपाठी के साथ एक ख़ास अंदाज़ में नज़र आए कार्तिक आर्यन ने बतौर कलाकार इसी फिल्म से अपने ऑन-स्क्रीन पहचान की एक नींव डाली थी, जो सहज था, भरोसेमंद था और अपने युवा दर्शकों की आवाज़ था।

यही वजह है कि 7 साल बाद भी फिल्म ‘लुका छुपी’ कार्तिक आर्यन के युवा दर्शकों के लिए बेहद ख़ास है, क्योंकि ये उन्हें याद दिलाती है किइसमें कार्तिक आर्यन परदे पर किसी फ़िल्मी हीरो की तरह नहीं, बल्कि आम भारतीय युवा पीढ़ी की सच्ची आवाज़ बनकर सामने आए थे।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें