इंटरनेशनल डेस्क: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अपनी ड्रोन ताकत का नया प्रदर्शन किया है। उसने ‘शाहेद’ सीरीज़ के ड्रोन से जुड़े एक बड़े टनल नेटवर्क का खुलासा किया है। हाल ही में दुबई के आसमान में शाहेद श्रृंखला के लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन देखे जाने की खबरें सामने आईं।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया कि इन ड्रोन में से एक ने शहर के एक इलाके को निशाना बनाया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर जांच का विषय बनी हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
शाहेद ड्रोन की खासियत
शाहेद ड्रोन को कम लागत में तैयार किया जाता है, लेकिन इसकी मारक क्षमता काफी ज्यादा मानी जाती है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। इन ड्रोन को रोकने के लिए अक्सर महंगी एंटी-ड्रोन मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे बचाव की लागत कई गुना बढ़ जाती है। आम हथियारबंद ड्रोन आमतौर पर रेंज और वजन की सीमाओं में बंधे होते हैं, लेकिन शाहेद ड्रोन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह ड्रोन और क्रूज मिसाइल की क्षमताओं का मिश्रण बन जाता है।
🇮🇷 Deep beneath the surface: IRGC unveils drone tunnel network pic.twitter.com/nfDTj9EKEs
— Sputnik (@SputnikInt) March 2, 2026
उदाहरण के तौर पर Shahed-136 लगभग 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। यह करीब 40 से 50 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम बताया जाता है। इसकी औसत रफ्तार लगभग 180 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। गति भले ज्यादा न हो, लेकिन इसकी लंबी दूरी तय करने की क्षमता इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। यह लगभग 3,000 से 4,000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है और इसका रडार सिग्नेचर छोटा होने के कारण इसे पकड़ना आसान नहीं होता।
ईरान ने दावा किया है कि उसने इन ड्रोन को अपने क्षेत्र के अंदर गहरे भूमिगत ठिकानों और टनल नेटवर्क से लॉन्च करने की व्यवस्था की है। ऐसे ठिकाने ड्रोन को सुरक्षित रखते हैं और दुश्मन के हमले से बचाते हैं। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और साधारण पिस्टन इंजन से चलने के कारण इनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कई रिपोर्टों में बताया गया है कि शाहेद ड्रोन के इंजन की आवाज दूर से सुनी जा सकती है, जिसे कुछ लोग डर पैदा करने वाली ध्वनि बताते हैं। लक्ष्य पर हमले से पहले इसकी आवाज सुनाई देना आम लोगों और सैनिकों में मनोवैज्ञानिक दबाव भी बना सकता है।
शाहेद ड्रोन का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन है। कम लागत में तैयार होने के कारण इन्हें एक साथ बड़ी संख्या में लॉन्च किया जा सकता है, जिसे ‘स्वॉर्म अटैक’ कहा जाता है। इस रणनीति में कई ड्रोन एक साथ अलग-अलग लक्ष्यों की ओर बढ़ते हैं, जिससे हवाई रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ जाता है। सैन्य ठिकानों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और संवेदनशील क्षेत्रों को भी इससे खतरा हो सकता है।
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