इंटरनेशनल डेस्क: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मंगलवार (3 मार्च) देर रात एक अहम सैन्य परीक्षण किया। अमेरिकी सेना ने कैलिफोर्निया तट पर डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह लॉन्च कैलिफोर्निया के पास स्थित Vandenberg Space Force Base से रात करीब 11 बजे किया गया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, लॉन्च की गई मिसाइल का नाम मिनटमैन-III है, जिसे जीटी-254 के नाम से भी जाना जाता है। यह मिसाइल प्रशांत महासागर की ओर भेजी गई और पश्चिम-मध्य प्रशांत में स्थित मार्शल द्वीप के पास अपने तय लक्ष्य क्षेत्र में जाकर गिरी। अमेरिकी वायुसेना की Air Force Global Strike Command ने बताया कि यह परीक्षण पहले से निर्धारित था और इसका मौजूदा वैश्विक तनाव से सीधा संबंध नहीं है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस टेस्ट का मकसद मिसाइल की तत्परता, सटीकता और सिस्टम की विश्वसनीयता की जांच करना था। यह नियमित परीक्षण कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसकी योजना कई साल पहले बनाई गई थी। अमेरिकी सेना का कहना है कि ऐसे परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं कि देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।
मिनटमैन-III की ताकत और क्षमता
मिनटमैन-III अमेरिका की सबसे पुरानी सक्रिय आईसीबीएम है, जिसका इस्तेमाल 1970 के दशक से किया जा रहा है। यह जमीन से लॉन्च की जाने वाली मिसाइल है और लगभग 13,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। इसमें परमाणु वॉरहेड लगाया जा सकता है। बताया जाता है कि यह मिसाइल हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से करीब 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखती है। हालांकि, इस ताजा परीक्षण के दौरान मिसाइल में कोई परमाणु हथियार नहीं लगाया गया था।
मिनटमैन-III अमेरिका के परमाणु त्रिकोण (न्यूक्लियर ट्रायड) का अहम हिस्सा है। परमाणु त्रिकोण में तीन प्रकार की क्षमताएं शामिल होती हैं, जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलें, पनडुब्बियों से दागी जाने वाली मिसाइलें और बमवर्षक विमानों से छोड़े जाने वाले परमाणु हथियार। इसका उद्देश्य संभावित दुश्मनों को हमले से रोकना और संतुलन बनाए रखना है।
अमेरिका के पास इस समय करीब 400 मिनटमैन-III मिसाइलें तैनात हैं, जो उसकी रणनीतिक रक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। ‘मिनटमैन’ नाम इसलिए रखा गया क्योंकि यह बहुत कम समय में लॉन्च के लिए तैयार हो सकती है। अमेरिकी सेना की 576वीं फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी रे ने कहा कि इस परीक्षण से मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करने में मदद मिली है। ऐसे परीक्षण देश की जमीनी परमाणु क्षमता को मजबूत और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं।
अमेरिका की योजना है कि साल 2030 तक मिनटमैन-III को नई पीढ़ी की मिसाइल से बदल दिया जाए। तब तक इस तरह के नियमित परीक्षण जारी रहेंगे, ताकि सिस्टम की सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।