Last Updated: September 24, 2026

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‘मैंने सदन की गरिमा और मर्यादा बढ़ाने का किया प्रयास’, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संभाला आसन

March 12, 2026

‘मैंने सदन की गरिमा और मर्यादा बढ़ाने का किया प्रयास’, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संभाला आसन

नई दिल्ली: लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को अपना आसन संभाला। उन्होंने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि मेरा हमेशा प्रयास रहता है कि सदन की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती रही।

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लोकसभा स्पीकर का बयान 

लोकसभा स्पीकर ने कहा, “मैंने हमेशा प्रयास किया कि सदन के अंदर हर सदस्य नियमों और प्रक्रिया के तहत विषय व मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करे। सभी सदस्यों को पर्याप्त अवसर देने का प्रयास किया गया। ये सदन समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बने, ऐसा मैंने प्रयास किया। मैंने हमेशा प्रयास किया कि सदस्यों को सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करूं, जो संकोच करते हैं या बिल्कुल नहीं बोलते हैं। मैंने अपने दोनों कार्यकाल में समय-समय पर, जिस पर सदस्य ने विचार नहीं किया, मैंने चैंबर में बुलाकर आग्रह किया कि वे सदन में अपनी बात रखें। क्योंकि सदन में बोलने से लोकतंत्र का संकल्प मजबूत होता है और सरकार की जवाबदेही भी तय होती है।”

उन्होंने कहा, “यह सदन विचारों व चर्चा का जीवंत मंच रहा है। हमारे संसदीय लोकतंत्र में सहमति और असहमति की महान परंपरा हमेशा से रही है। जब संविधान निर्माताओं ने स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का निर्माण किया, तब गहन विमर्श और अनुभव के आधार पर संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था को अपनाया। आज दुनिया के अंदर संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था ही शासन चलाने की सर्वश्रेष्ठ पद्धति है। इस व्यवस्था में संसद सिर्फ कानून बनाने का मंच न होकर, राष्ट्र की लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र बिंदु भी है।”

स्पीकर ओम बिरला ने आगे कहा कि संविधान के आर्टिकल 93 में अध्यक्ष के निर्वाचन का प्रावधान है। मुझे इस सदन ने दूसरी बार अध्यक्ष पद का दायित्व और अवसर दिया। मैंने हमेशा प्रयास किया कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के साथ संचालित हो। सभी को साथ लेकर सामंजस्य व्यवस्था और कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए मैंने दायित्व को निभाया।

अविश्वास प्रस्ताव पर जानें क्या बोले ओम बिरला?

अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने कहा, “मंगलवार को विपक्ष के कुछ सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। हमारे संविधान की ओर से स्थापित संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था में मेरा हमेशा अटूट विश्वास रहा है। मैंने नैतिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन की कार्यवाही से अपने आप को अलग किया। पिछले दो दिनों में सदन ने लोकतंत्र की महत्वपूर्ण प्रणाली को पूरा किया। इस चर्चा के दौरान अनेक विचार, दृष्टिकोण और भावनाएं सदन के सामने रखी गईं। मैंने हर सदस्य की बात को गंभीरता और ध्यान से सुना। सभी सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”

अपने संबोधन में स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में दो दिन सदस्यों ने चर्चा की। 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, ताकि सभी सदस्यों के विचार, तर्क और चिंताएं सदन के सामने आ सकें। उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेताओं ने विपक्ष की आवाज दबाने और निष्पक्षता के अभाव की बात की। उन्होंने आसन की निष्पक्षता, सदन की कार्यकुशलता और संसद की उपलब्धियों की बात की। कुछ सदस्यों ने संसदीय लोकतंत्र की व्याख्या की और सदन की गरिमापूर्ण परंपराओं, नियमों व प्रक्रियाओं पर अपना दृष्टिकोण रखा।”

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उन्होंने यह भी कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। यहां उपस्थित हर सदस्य लाखों नागरिकों के जनादेश को लेकर आते हैं और उनकी समस्याओं, कठिनाओं को दूर करने के साथ-साथ अपेक्षा और आकांक्षाओं को पूर्ण करने की आशा भी साथ लेकर आता है।

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