इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब 19वें दिन में पहुंच चुका है। हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। एक तरफ अमेरिका और इजरायल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है और पीछे हटने को तैयार नहीं है। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे वहां काफी नुकसान हुआ है। लेकिन ईरान भी चुप नहीं बैठा है। वह इजरायल और खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल से लगातार हमले कर रहा है।
अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अमेरिकी कांग्रेस से जुड़े एक अहम आयोग U.S.-China Economic and Security Review Commission ने अपनी नई रिपोर्ट में बड़ा दावा किया है। इस रिपोर्ट का नाम “China-Iran Fact Sheet” है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, ईरान की मदद कर रहा है और उसे कई तरह के सैन्य उपकरण और तकनीक दे रहा है।
चीन ने दिए ड्रोन और मिसाइल से जुड़ी मदद
रिपोर्ट के अनुसार चीन ने ईरान को हमले करने वाले (आक्रामक) ड्रोन दिए हैं। चीन और ईरान के बीच एंटी-शिप क्रूज मिसाइल (समुद्री जहाजों को निशाना बनाने वाली मिसाइल) का बड़ा सौदा भी लगभग तय हो गया था। हालांकि, इन मिसाइलों की डिलीवरी की तारीख पर दोनों देशों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन पाई थी।
रॉकेट ईंधन बनाने वाला केमिकल भी दिया
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन ने ईरान को सोडियम पर्क्लोरेट नाम का एक खास रसायन दिया है। यह केमिकल ठोस रॉकेट ईंधन बनाने में इस्तेमाल होता है। इसका उपयोग मिसाइल बनाने में किया जाता है। लगभग 2 मार्च 2026 के आसपास ईरान के दो सरकारी जहाज चीन के गाओलान पोर्ट से इस केमिकल को लेकर रवाना हुए थे। इससे पहले जनवरी 2025 में भी चीन करीब 1000 टन यह केमिकल ईरान को दे चुका है।
सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम की भी मदद
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि साल 2021 में चीन ने ईरान को अपने सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम तक सैन्य स्तर की पहुंच दी थी। संभावना है कि ईरान अभी जो ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है, उसमें इसी सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है।
कुल मिलाकर क्या समझें?
इस रिपोर्ट से यह संकेत मिलता है कि ईरान को चीन से सैन्य और तकनीकी मदद मिल रही है। इससे मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक हो सकता है। आने वाले समय में हालात और बिगड़ने की आशंका है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...