नई दिल्ली: किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने कपास सीजन 2023-24 के लिए कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) को 1,718.56 करोड़ रुपए के फंड को मंजूरी दी है। इस फंड का उद्देश्य देशभर के कपास किसानों को प्रत्यक्ष मूल्य समर्थन प्रदान करना है।
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2023-24 के कपास सीजन के दौरान, अनुमानित कपास की खेती का क्षेत्रफल 114.47 लाख हेक्टेयर था, और उत्पादन 325.22 लाख गांठ रहने का अनुमान था, जो वैश्विक कपास उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है।सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर कपास के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करती है। सीसीईए के अनुसार, एमएसपी को कपास किसानों के हितों की रक्षा के लिए निर्धारित किया जाता है, विशेष रूप से उन अवधियों के दौरान जब बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे गिर जाते हैं।
#WATCH | Delhi | Union Minister Ashwini Vaishnaw says,” Cabinet has approved MSP funding of Rs. 1,718.56 crore to CCI for cotton seasons 2023-24 for direct support to cotton farmers.” pic.twitter.com/RQbAPRVdAH
— ANI (@ANI) March 18, 2026
आधिकारिक बयान में कहा गया, “ये उपाय कपास की कीमतों को स्थिर करने, मजबूरी में बिक्री रोकने और किसानों को लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि बाजारों में समावेशिता बढ़ाकर, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के संचालन से कपास उत्पादक समुदायों की आर्थिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।” बयान में आगे कहा गया है कि कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है, जो लगभग 6 लाख किसानों की आजीविका का आधार है और प्रसंस्करण, व्यापार और वस्त्र उद्योग सहित संबंधित गतिविधियों में लगे 400-500 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करती है।
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कपास में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) संचालन के लिए सीसीआई को केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। बाजार मूल्य एमएसपी स्तर से नीचे गिरने पर यह एजेंसी किसानों से उचित औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) वाली सभी कपास की खरीद बिना किसी मात्रा सीमा के करती है, जिससे किसानों को एक सुनिश्चित सुरक्षा कवच मिलता है। अपनी तैयारियों के तहत, सीसीआई ने कपास उत्पादक सभी 11 प्रमुख राज्यों में एक मजबूत खरीद नेटवर्क स्थापित किया है, जिसमें 152 जिलों में 508 से अधिक खरीद केंद्र कार्यरत हैं, जो किसानों के लिए सुगम और सुलभ खरीद सुनिश्चित करते हैं।
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