Last Updated: September 23, 2026

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ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता जरूरी, 2030 तक भारत बने ग्लोबल हब: राजनाथ सिंह

March 19, 2026

ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता जरूरी, 2030 तक भारत बने ग्लोबल हब: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत की सुरक्षा और रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाने के लिए देश को ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी है। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज़ कॉन्क्लेव में कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार, उद्योग और अन्य सभी भागीदारों को मिलकर काम करना होगा। सरकार इस दिशा में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है।

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2030 तक भारत बने ग्लोबल हब: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि अगर भारत को भविष्य में मजबूत और स्वतंत्र रक्षा प्रणाली बनानी है, तो उसे ड्रोन टेक्नोलॉजी में खुद पर निर्भर होना पड़ेगा। उन्होंने लक्ष्य रखा कि साल 2030 तक भारत स्वदेशी ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा वैश्विक केंद्र (ग्लोबल हब) बने। उन्होंने यह भी बताया कि आज के समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इज़रायल संघर्ष जैसे उदाहरणों से साफ है कि आने वाले समय में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को सिर्फ ड्रोन बनाना ही नहीं, बल्कि उसके हर छोटे-बड़े हिस्से जैसे सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और अन्य कंपोनेंट्स भी देश में ही बनाने होंगे। अभी ज्यादातर देशों को इन चीजों के लिए दूसरे देशों, खासकर चीन, पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने माना कि यह काम आसान नहीं है, लेकिन अगर सभी मिलकर “मिशन मोड” में काम करें, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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यह कॉन्क्लेव 19 से 20 मार्च 2026 तक आयोजित होगा

यह कार्यक्रम नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया गया, जिसका आयोजन रक्षा उत्पादन विभाग (DDP) ने किया। दो दिन चलने वाला यह कॉन्क्लेव 19 से 20 मार्च 2026 तक आयोजित हो रहा है। इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य भारत के रक्षा क्षेत्र में MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग), स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना है।

साथ ही, इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और नई मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों को अपनाने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। इस पहल का मकसद भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक स्तर पर उसकी प्रतिस्पर्धा क्षमता को मजबूत करना है।

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