इंटरनेशनल डेस्क: भारत में चीनी राजदूत श्यू फ़ेईहोंग ने कहा है कि युवा दोनों सभ्यताओं के बीच सबसे गतिशील दूत हैं। उन्होंने कहा कि चीन और भारत में 120 करोड़ से अधिक युवा हैं, जो दोनों देशों के संबंधों की रीढ़ हैं। राजदूत ने यह बात गुरुवार को “द प्रिंट” अखबार में प्रकाशित ‘प्राचीन सभ्यताओं के पार, युवा भविष्य को आकार देते हैं’ नामक लेख में कही।
राजदूत ने लेख में उल्लेख किया कि दो वर्ष पहले भारत आने पर उन्होंने पाया कि चीन के ऑनलाइन गेम, वेब सीरीज और ऑनलाइन साहित्य भारतीय युवाओं के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। वहीं, भारतीय योग, व्यंजन और अरोमाथेरेपी चीनी युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।
राजदूत ने चीन-भारत मैत्री के इतिहास का स्मरण करते हुए कहा कि 1,300 वर्ष पूर्व चीनी महाचार्य ह्वेन त्सांग ने 27 वर्ष की आयु में भारत की यात्रा की थी। वर्ष 1924 में रवींद्रनाथ टैगोर ने चीन का दौरा किया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस जैसे युवा भारतीय डॉक्टरों ने चीन में चिकित्सा सेवाएं दी थीं।
राजदूत ने युवाओं से चीन-भारत मैत्री के प्रचारक, दोनों देशों के विकास में योगदानकर्ता और विश्व शांति के संरक्षक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं। राजदूत ने लेख में स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की शक्ति ही राष्ट्र की शक्ति है। चीन-भारत संबंधों का भविष्य अंततः दोनों देशों की युवा पीढ़ी के हाथों में है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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