UP ATS Busts Terror Module : दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दहशत फैलाने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की जांच में पता चला कि आतंकी अबू बकर और उसके साथी देश के कई बड़े शहरों में डर का माहौल बनाने की योजना बना रहे थे। वे सोशल मीडिया के जरिए आपस में जुड़े हुए थे और अलग-अलग जगहों की जानकारी साझा कर रहे थे।
सोशल मीडिया के जरिए बनाई गई योजना
जांच में सामने आया कि अबू बकर ने अपने साथी साकिब को वॉट्सऐप के माध्यम से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और मेरठ के कई अहम स्थानों की लोकेशन भेजी थी। ये जगहें खासतौर पर भीड़भाड़ वाले बाजार और बड़े कार शोरूम थे। साकिब और उसके साथियों को इन जगहों की पहले रेकी करने और फिर 12 से ज्यादा कार शोरूम में आग लगाने का काम सौंपा गया था। इनमें मेरठ के भी कुछ शोरूम शामिल थे।
मोबाइल जांच से हुए बड़े खुलासे
जब ATS ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पता चला कि यह गिरोह पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में था। वे टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। जांच में यह भी सामने आया कि वे कुछ कट्टरपंथी विचारधाराओं से प्रभावित होकर धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने की योजना बना रहे थे।
स्लीपर सेल की तरह काम कर रहा था नेटवर्क
यह नेटवर्क स्लीपर सेल की तरह काम कर रहा था। यानी छोटे-छोटे समूह बनाए गए थे और हर समूह को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी, ताकि किसी को शक न हो। इसमें स्थानीय युवाओं को भी जोड़ा गया था। उन्हें पैसे का लालच देकर इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया। कुछ युवकों को लोगों की जानकारी जुटाने और कुछ को घटनाओं को अंजाम देने का काम दिया गया था।

युवाओं को लालच देकर जोड़ा गया
जांच में पता चला कि लोकेश और विकास जैसे युवाओं को पैसों का लालच देकर इस गिरोह में शामिल किया गया था। वहीं, एक अन्य आरोपी अरबाब को पश्चिमी यूपी से करीब 25 युवाओं को जोड़ने का काम दिया गया था। इन युवाओं के जरिए दिल्ली-एनसीआर के महत्वपूर्ण इलाकों की जानकारी इकट्ठा की जा रही थी।
बड़े नेताओं को निशाना बनाने की आशंका
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस साजिश का मकसद सिर्फ डर फैलाना नहीं था, बल्कि आर्थिक नुकसान पहुंचाना भी था। भीड़भाड़ वाले बाजारों और शोरूम में आगजनी कर लोगों में भय पैदा करना उनकी योजना थी। इसके अलावा, कुछ बड़े नेताओं की हत्या की साजिश की भी आशंका जताई जा रही है।
फर्जी टेलीफोन नेटवर्क का इस्तेमाल
ATS यह भी जांच कर रही है कि इन घटनाओं में किस तरह के विस्फोटक या केमिकल का इस्तेमाल किया जाना था। साथ ही यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने देश में फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज बना रखे थे। इनका इस्तेमाल गुप्त रूप से बातचीत करने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए किया जाता था।
लखनऊ में बड़ी वारदात की थी तैयारी
साकिब को लखनऊ में एक बड़ी घटना को अंजाम देने के निर्देश दिए गए थे। इसके बदले उसे बड़ा इनाम देने का वादा किया गया था। इसके अलावा, उसे एक महिला कमांडर से मिलवाने की योजना भी थी, जो आगे की रणनीति तय करती। घटना के बाद उसे महाराष्ट्र या हैदराबाद भागने के निर्देश दिए गए थे, जहां उसे छिपने और मदद मिलने की व्यवस्था की गई थी।
समय रहते टीम ने की कार्रवाई
हालांकि, इससे पहले कि यह साजिश पूरी हो पाती, ATS ने समय रहते कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और आगे भी कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।
ATS टीम का काम क्या होता है…
एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) राज्य पुलिस की एक विशेष इकाई है जिसका मुख्य कार्य आतंकवादी गतिविधियों को रोकना और उनसे निपटना होता है। इसकी स्थापना सबसे पहले 1990 में महाराष्ट्र में हुई थी, और वर्तमान में यह उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे कई भारतीय राज्यों में सक्रिय है।
वहीं, कल दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट और उत्तर प्रदेश एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में ISIS के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से की गई थी। गिरफ्तार आतंकी की पहचान रिजवान अहमद के रूप में हुई थी। जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार रिजवान अहमद 2015 से ISIS से जुड़ा हुआ था और भारत में आतंकी संगठन के लिए रिक्रूटमेंट का काम संभाल रहा था।
ये होते हैं ATS टीम के मुख्य कार्य
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