लखनऊः उत्तर प्रदेश एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में लखनऊ से चार संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड मेरठ का रहने वाला साकिब उर्फ डेविल है, जो सीधे पाकिस्तान में बैठे लोगों के संपर्क में था।
क्या थी साजिश?
जांच में सामने आया है कि इस गैंग की योजना बहुत खतरनाक थी। ये लोग रेलवे सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर ट्रेन हादसे करवाना चाहते थे। इसके अलावा बड़े शहरों में आगजनी कर डर और अफरा-तफरी फैलाने की भी योजना थी। लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल बॉक्स को उड़ाने की पूरी तैयारी की जा चुकी थी, जिससे ट्रेनों का संचालन बाधित हो सकता था और बड़े हादसे हो सकते थे।
आगजनी की भी थी तैयारी
सिर्फ रेलवे ही नहीं, बल्कि गाजियाबाद और मेरठ जैसे शहरों में भी नुकसान की साजिश रची गई थी। आरोपी गैस सिलेंडर से भरे ट्रकों और गाड़ियों के शोरूम में आग लगाने की योजना बना रहे थे, ताकि भारी आर्थिक नुकसान हो और लोगों में डर फैल सके।
पाकिस्तान से मिल रही थी फंडिंग
जांच में यह भी सामने आया है कि साकिब उर्फ डेविल को इस काम के लिए पाकिस्तान से सीधे पैसे मिल रहे थे। वह इन पैसों को अपने तीन साथियों—लोकेश उर्फ पपला, विकास उर्फ रौनक और अरबाब में बांटता था।
गूगल लोकेशन का इस्तेमाल
इस साजिश को अंजाम देने के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। साकिब ने लखनऊ और मेरठ के महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी की और उनके वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजे। वहीं से उसे गूगल लोकेशन की स्क्रीन रिकॉर्डिंग भेजी जाती थी, जिसके आधार पर वह तस्वीरें खींचकर वापस भेजता था। इस तरह पूरी योजना डिजिटल तरीके से तैयार की जा रही थी।
सोशल मीडिया से बना गिरोह
साकिब सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ अपने वीडियो पोस्ट करता था। इन्हीं वीडियो को देखकर लोकेश और विकास उसके संपर्क में आए और धीरे-धीरे इस गैंग का हिस्सा बन गए।
आगे की जांच जारी
यूपी एटीएस ने चारों आरोपियों की एक हफ्ते की रिमांड मांगी है। इस मामले की सुनवाई एनआईए/एटीएस स्पेशल कोर्ट में होनी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिमांड के दौरान पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और भारत में उनके अन्य संपर्कों के बारे में और भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
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