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Haryana : बैसाखी महोत्सव : दिखे पहलां आलै ठाठ, कुम्हार का चाक, पीढ़ा और खाट

April 14, 2026

Haryana : बैसाखी महोत्सव : दिखे पहलां आलै ठाठ, कुम्हार का चाक, पीढ़ा और खाट

कुरुक्षेत्र। Baisakhi Festival at kurukshetra हरियाणवी संस्कृति को प्रदर्शित करती हरियाणा विरासत पवेलियन नागरिकों को खूब पसंद आ रहा है। नागरिकों को हरियाणा पैवेलियन में दिखे पहलां आलै ठाठ बाट, कुम्हार का चाक, पीढ़ा और खाट।

देखने को मिली सांस्कृतिक विरासत 

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डीसी ने कहा कि केडीबी मेला ग्राउंड में आयोजित प्रदर्शनी में हरियाणा के गांवों से जुड़ी हुई सभी प्राचीन वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया जो अब लुप्तप्राय हो चुकी हैं। जिन्हें युवा पीढ़ी को दिखाया गया है। इस बैसाखी महोत्सव में प्रदेश की परंपरागत सांस्कृतिक विरासत देखने को मिली। इस पैवेलियन में विरासत दी हेरिटेज विलेज कुरुक्षेत्र द्वारा सांस्कृतिक प्रदर्शनी हरियाणा के हस्तशिल्प का आकर्षण का केंद्र रहा। प्रशासन का प्रयास है कि अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए इन वस्तुओं को दिखाने और रूबरू करवाने का प्रयास किया गया है। इसी के साथ लोक पारंपरिक हस्तकला के अनेक हरियाणवी नमूने हरियाणवी फुलझड़ी, हरियाणवी लोक वेशभूषा प्रदर्शनी में पारंपरिक परिधानों को जीवंत रूप से दिखाने के लिए महिला द्वारा पारंपरिक पहनावे में ग्रामीण जीवन की झांकी प्रस्तुत की गई।

नजर आई हरियाणा की फुलकारी कला 

उन्होंने कहा कि मेले में हरियाणा की फुलकारी कला को दिखाया गया, इसमें शिल्पकार मौके पर ही सुंदर डिजाइन तैयार करते नजर आएंगे। इस पैवेलियन में कुम्हार द्वारा पारंपरिक चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाते देखना दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बना। मेले में लोहार कला के माध्यम से प्राचीन ताले भी प्रदर्शित किया गया। इसी तरह रथ निर्माण कला के माध्यम से हरियाणा के पारंपरिक परिवहन और उससे जुड़ी कारीगरी को दर्शाया जा रहा है।

महोत्सव में रही शिल्प कला की धूम

डीसी ने कहा कि इसके साथ ही इंडी बनाने की पारंपरिक विधि, बिजना और दरी बुनाई जैसे शिल्प, गुड़्डा-गुडिय़ा निर्माण, पीढ़ा और चारपाई बुनाई विशेष रूप से खाट (चारपाई) बुनाई का प्रदर्शन भी मेले में जीवंत रूप में देखाया गया। खाट एवं पीढ़ा हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। पीढ़ा, खटोला, खाट, पिलंग, दैहला आदि घरों, बैठकों एवं चौपालों में प्रयोग किए जाते रहे हैं। यहां पर सैंकड़ों वर्ष पुराने तांबे और पीतल के बर्तन भी प्रदर्शनी में शामिल किए गए। उन्होंने बताया कि बैसाखी मेला न केवल मनोरंजन का साधन बनाया गया। यहां पर युवाओं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। यह आयोजन हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

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