एंटरटेनमेंट डेस्क(फरीद शेख): फिल्म की सबसे खास बात इसका यूनिक और एक्सपेरिमेंटल कॉन्सेप्ट है, जो शुरुआत से ही ऑडियंस को एक अलग दुनिया में ले जाने की कोशिश करता है। स्क्रीनप्ले भले ही थोड़ा कॉम्प्लेक्स लगे, लेकिन इसमें कई लेयर्स हैं जो धीरे-धीरे खुलती हैं और कहानी को इंटरेस्टिंग बनाती हैं। डायलॉग्स भी अलग अंदाज़ में लिखे गए हैं, जो फिल्म के टोन को मैच करते हैं, और कॉमेडी सीन्स हल्का-फुल्का एंटरटेनमेंट देने में कामयाब रहते हैं।
कहानी मंगलपुर की है, जहां दुल्हन के गायब होने का मिस्ट्री एंगल और वधुसुर जैसे क्रिएचर का कॉन्सेप्ट फिल्म को एक फ्रेश टच देता है। प्राचीन समय, ईविल कैरेक्टर और देवी जैसी लड़की के कनेक्शन के साथ कहानी को एक माइथोलॉजिकल डेप्थ देने की कोशिश की गई है, जो इसे बाकी हॉरर-कॉमेडी फिल्मों से अलग बनाती है।
अक्षय कुमार का किरदार अर्जुन आचार्य अपने दादाजी के पुराने बंगले को पाने के लिए मंगलपुर आता है, और यहीं से कहानी दिलचस्प मोड़ लेती है। प्रॉपर्टी एंगल और शादी का सेटअप कहानी को एक ग्रैंड स्केल देता है। जगदीश (परेश रावल) का वेडिंग प्लानर वाला किरदार एंटरटेनिंग है और कई जगह स्माइल लाने में सफल रहता है।

Rajpal Yadav का किरदार फिल्म को एक अलग स्पाइस देता है। भूत बंगला में नज़र आते हैं और उन्होंने अपना बेस्ट दिया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग कमाल की है।
अगर उन्हें और अच्छे कॉमिक डायलॉग्स मिलते, तो मज़ा और भी बढ़ सकता था। फिर भी, उन्होंने पूरी ईमानदारी से अपना किरदार निभाया है और अपनी एक्टिंग से फिल्म को संभालने की पूरी कोशिश की है।
वामिका गब्बी का रोल भी कहानी में मिस्ट्री और इमोशन दोनों जोड़ता है। उनका ट्विन सिस्टर वाला ट्विस्ट और क्लाइमैक्स में आत्मा के जरिए मदद करने वाला एंगल फिल्म को इमोशनल टच देता है, जो ऑडियंस को कनेक्ट करने की कोशिश करता है।
अक्षय कुमार अपनी एनर्जी और स्क्रीन प्रेज़ेंस के साथ फिल्म को आगे बढ़ाते हैं। उनका ओवर-द-टॉप स्टाइल इस तरह की हॉरर-कॉमेडी जॉनर में फिट बैठता है और कई जगह एंटरटेनमेंट वैल्यू बढ़ाता है।
फिल्म का पहला हाफ सेटअप में जाता है, जिससे कहानी की दुनिया और कैरेक्टर्स को अच्छे से समझाया गया है। वहीं सेकंड हाफ में ट्विस्ट और रिवील्स के साथ कहानी तेज़ हो जाती है। कॉमेडी और हॉरर का बैलेंस बनाए रखने की अच्छी कोशिश की गई है।
भरतनाट्यम वाला सेटअप और बैकग्राउंड म्यूज़िक फिल्म को एक रिच और एटमॉस्फेरिक फील देता है। कुछ जगह यह क्लासिक हॉरर-कॉमेडी वाइब जरूर देता है, जो ऑडियंस को एंगेज रखने में मदद करता है। वधुसुर का कॉन्सेप्ट फिल्म की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ है। हीरो और विलेन एंगल को एक साथ जोड़ने का आइडिया नया और बोल्ड है, जो कहानी को अलग पहचान देने की कोशिश करता है।
ईमानदारी से देखें तो फिल्म एक एंटरटेनिंग पैकेज है, जिसमें हॉरर, कॉमेडी, मिस्ट्री और इमोशन का अच्छा मिक्स है। यह एक ऐसी फिल्म है जो अपने स्टाइल और प्रेजेंटेशन से ऑडियंस को बांधे रखने की कोशिश करती है। यह फिल्म एक फुल एंटरटेनमेंट पैकेज है, जिसमें हॉरर और कॉमेडी का अच्छा मेल देखने को मिलता है। म्यूज़िक और विज़ुअल्स फिल्म की फील को और स्ट्रॉन्ग बनाते हैं।
अक्षय कुमार अपनी एनर्जी से फिल्म को संभालते हैं, वामिका गब्बी कहानी में मिस्ट्री जोड़ती हैं और बाकी सपोर्टिंग कास्ट भी अच्छा साथ देती है। कुल मिलाकर फिल्म एक अच्छा एक्सपीरियंस देती है, खासकर उन लोगों के लिए जो हॉरर-कॉमेडी जॉनर को पसंद करते हैं।
रेटिंग:
इस फिल्म को 3.5 स्टार की रेटिंग दी जा सकती है। ⭐⭐⭐½
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