Last Updated: October 2, 2026

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को SC से राहत नहीं, अग्रिम जमानत बढ़ाने से इनकार किया

April 17, 2026

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को SC से राहत नहीं, अग्रिम जमानत बढ़ाने से इनकार किया

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी के खिलाफ आरोप लगाने के लिए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज मामले में 20 अप्रैल तक संभावित दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने का अनुरोध करने वाली उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने खेड़ा से कहा कि वह इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत का रुख करें। खेड़ा ने पांच अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्तियां हैं, जिनका उल्लेख शर्मा ने नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के लिए दाखिल अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया था।

 

न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने शुक्रवार को खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी की दलीलों पर गौर किया और कांग्रेस नेता की याचिका पर सुनवाई करने वाले असम की उस अदालत से कहा कि इस मामले में यदि उच्चतम न्यायालय और तेलंगाना उच्च न्यायालय की कोई प्रतिकूल टिप्पणी हो, तो उसे ध्यान में न रखा जाए।

पीठ ने असम की अदालतों से यह भी कहा कि वे खेड़ा की याचिका पर शीघ्र सुनवाई करें। उच्चतम न्यायालय ने 15 अप्रैल को तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें खेड़ा को इस मामले में एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि यह क्षेत्राधिकार के अभाव का मामला है और खेड़ा की याचिका में यह नहीं बताया गया कि उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख क्यों किया।

खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 175 (चुनाव से संबंधित झूठा बयान), धारा 35 (शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार) और धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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