
अंबाला। हरियाणा की सियासत एक बार फिर गर्माने जा रही है। शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के उपचुनावों का ऐलान होते ही प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 10 मई को होने वाली वोटिंग और 13 मई को आने वाले नतीजों के बीच करीब एक महीने का समय है। इस बार निकाय चुनाव सिर्फ पार्षद और चेयरमैन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह बड़े सियासी चेहरों की प्रतिष्ठा की भी अहम परीक्षा बन गए हैं। सांसद और विधायक अपने-अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। राजनीतिक दलों ने भी बूथ स्तर तक रणनीति तैयार कर चुनावी मैदान में दमखम दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। 528 पंचायत पदों के साथ 7 निकायों में चुनाव और 6 में उपचुनाव न सिर्फ गांव से शहर तक की तस्वीर बदल सकते हैं, बल्कि हरियाणा की राजनीति के नए समीकरण भी तय करेंगे।
ये चुनाव सिर्फ चेयरमैन और मेयर चुनने तक सीमित नहीं हैं। इन्हें मिनी चुनाव जरूर कहा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए ये सेमीफाइनल जैसा मुकाबला है। इसकी वजह साफ है। जिन सीटों पर चुनाव होना है। उन पर सीधे तौर पर सांसदों, मंत्रियों और विधायकों की प्रतिष्ठा जुड़ी है। करीब पांच सांसद, चार मंत्री, छह विधायक और आठ पूर्व विधायकों की साख इन चुनावों में दांव पर है। ऐसे में हर पार्टी अपने-अपने गढ़ बचाने और विरोधी के किले में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है।
पंचकूला, अंबाला और सोनीपत जैसे शहरों में मुकाबला सबसे ज्यादा दिलचस्प माना जा रहा है। पंचकूला में जहां भाजपा का संगठनात्मक दबदबा है, वहीं कांग्रेस भी यहां अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी है। अंबाला भाजपा का गढ़ माना जाता है। इस कारण सियासी नजरें यहां टिकी हैं। अंबाला में शहर में नगर निगम के चुनाव हैं। इस बार विधानसभा में पराजित रहे पूर्व विधायक असीम गोयल के लिए भी यहां मौका है। असीम मुख्यमंत्री नायब सैनी के खास माने जाते हैं। ऐसे में उन पर इन चुनावों का दारोमदार भी ज्यादा है।
सोनीपत को एक तरफ भाजपा के प्रदेश नेतृत्व का क्षेत्र माना जाता है, तो दूसरी ओर ये पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का मजबूत गढ़ रहा है। रेवाड़ी और धारूहेड़ा में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का प्रभाव है, जबकि रोहतक और सांपला क्षेत्र में हुड्डा परिवार की साख दांव पर मानी जा रही है। उकलाना जैसे क्षेत्रों में भी स्थानीय नेताओं के साथ बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है।
तीन नगर निगमों चुनाव होंगे. अंबाला, पंचकूला और सोनीपत के महापौरों और सभी वार्डों के सदस्यों के पदों एवं नगर परिषद, रेवाड़ी और तीन नगर पालिकाओं- सांपला (रोहतक), धारूहेड़ा (रेवाड़ी) और उकलाना (हिसार) के अध्यक्षों और सभी वार्डों के सदस्यों के आम चुनाव और सदस्यों की 6 रिक्त पदों- नगर परिषद टोहाना (फतेहाबाद) के वार्ड नंबर 17, नगर परिषद झज्जर (झज्जर) के वार्ड नंबर 13, नगर पालिका राजौंद (कैथल) के वार्ड नंबर 11, नगर पालिका, तरावड़ी (करनाल) के वार्ड नंबर 8, नगर पालिका, कनीना (महेंद्रगढ़) के वार्ड नंबर 14 और नगर पालिका, सढ़ौरा (यमुनानगर) के वार्ड नंबर 9 के उपचुनाव के लिए कार्यक्रम जारी है।
नामांकन फार्म और नामांकन के साथ दिए जाने वाले शपथ पत्रों के फॉर्मेट राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट https://www.secharyana.gov.in पर उपलब्ध है. नगर निगम, नगर परिषद नगर पालिका के वार्डों की कुल संख्या, महापौर/अध्यक्ष/सदस्यों के पदों/वार्डों जो कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति (महिला), पिछड़ा वर्ग ए, पिछड़ा वर्ग ए (महिला), पिछड़ा वर्ग बी, पिछड़ा वर्ग (महिला) एवं महिलाओं के लिए आरक्षित हैं का ब्यौरा अनुलग्नक-बी में दिया गया है. अपेक्षित वार्डों की संख्या का ब्यौरा अनुलग्नक-सी में दिया गया है. जिन नगर निकायों के उप-चुनाव होने हैं और उनके लिए आरक्षित पदों का ब्यौरा अनुलग्नक-डी में दिया गया है.
निकाय चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल होगा। इसके लिए दो हजार से ज्यादा मशीनें लगेंगी। वीवीपैट का इस्तेमाल नहीं होगा, जिससे वोट की पुष्टि मतदाता नहीं कर पाएंगे। नोटा का विकल्प रहेगा, लेकिन अगर नोटा को सबसे ज्यादा वोट भी मिलते हैं, तब भी चुनाव रद्द नहीं होगा। ऐसे केस में नोटा के बाद जिसको सबसे ज्यादा वोट मिले हैं। उसे विजेता घोषित कर दिया जाएगा। बड़ी बात ये है कि पंच चुनाव में नोटा का विकल्प नहीं है। मतदाता सूची विधानसभा चुनाव वाली ही रहेगी, लेकिन नाम छूटने पर 25 अप्रैल तक शहरी और 21 अप्रैल तक पंचायत क्षेत्रों में सुधार का मौका दिया गया है।
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